सावन (श्रावण) का महीना शुरू होते ही हिंदू धर्म में खान-पान से जुड़े कई कड़े नियमों का पालन किया जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख नियम है—प्याज और लहसुन का पूरी तरह से त्याग करना। कई लोग इसे केवल एक धार्मिक अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन सच यह है कि हमारे शास्त्रों और आयुर्वेद में इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, स्वास्थ्य संबंधी और जैविक (Biological) कारण बताए गए हैं।
आइए समझते हैं कि आखिर मानसून और सावन के दौरान प्याज-लहसुन से परहेज क्यों किया जाता है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।
आयुर्वेद के अनुसार, हमारे भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—सात्विक, राजसिक और तामसिक।
प्याज और लहसुन तामसिक भोजन में आते हैं: हालांकि प्याज और लहसुन में कई औषधीय गुण होते हैं, लेकिन ये शरीर में 'तामस' (सुस्ती, आलस) और 'रजस' (जुनून, कामवासना, क्रोध) के गुणों को बढ़ाते हैं।
मानसिक शांति में बाधा: प्याज और लहसुन का सेवन करने से मन चंचल होता है, गुस्सा जल्दी आता है और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। सावन का महीना भक्ति, पूजा और ध्यान का महीना होता है, इसलिए मन को शांत और सात्विक रखने के लिए इनका त्याग किया जाता है।
सावन का महीना मानसून (बरसात के मौसम) में आता है। साइंस और बायोलॉजी के नजरिए से इसके पीछे दो बड़े कारण हैं:
धीमा पाचन (Slow Digestion): बरसात के मौसम में धूप कम निकलती है और हवा में नमी (Humidity) अधिक होती है, जिससे इंसानी शरीर का पाचन तंत्र (Metabolism/Digestive System) काफी धीमा और कमजोर हो जाता है।
भारी और गर्म प्रकृति: प्याज और लहसुन पचने में काफी भारी (Heavy) होते हैं और इनकी तासीर गर्म होती है। कमजोर पाचन तंत्र के समय तामसिक भोजन करने से पेट में गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और पाचन संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
समुद्र मंथन की कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला, तो राहू और केतु नाम के दैत्यों ने छल से अमृत पी लिया। जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके सिर काटे, तो उनके रक्त की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। माना जाता है कि उन्हीं बूंदों से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई।
शुद्धता का प्रतीक: चूंकि इनकी उत्पत्ति असुरों के रक्त से मानी जाती है और इनमें तेज गंध होती है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ और देवी-देवताओं के भोग में वर्जित माना जाता है।
हमारे सनातन धर्म के हर नियम के पीछे साइंस छिपी हुई है। सावन में प्याज-लहसुन न खाना सिर्फ भक्ति नहीं, बल्कि मानसून के मौसम में अपने पेट और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने का सबसे बेहतरीन तरीका है। तो इस सावन सात्विक भोजन अपनाएं और सेहतमंद रहें!