नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से साधक को वैराग्य, सदाचार और संयम की प्राप्ति होती है। यदि आप जीवन के कठिन संघर्षों से थक चुके हैं, तो आज शाम इन मंत्रों का शांत मन से जाप आपके भीतर नई ऊर्जा का संचार करेगा।
यह मंत्र माँ के स्वरूप की वंदना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
मंत्र: "या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
लाभ: मानसिक शांति और आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है।
यदि आप किसी विशेष लक्ष्य या परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह मंत्र आपके लिए है।
मंत्र: "ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नमः॥"
लाभ: कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और एकाग्रता बढ़ती है।
पूजा के समय माँ का ध्यान करने के लिए इस मंत्र का उच्चारण करें।
मंत्र: "दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥"
लाभ: माँ के आशीर्वाद से जातक का स्वभाव सौम्य और तपस्वी बनता है।
मंत्र: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः॥"
लाभ: यह नवाण मंत्र के साथ संयुक्त है, जो नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है।
मंत्र: "तपश्चारिणी त्वं हि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥"
लाभ: बौद्धिक क्षमता का विकास होता है और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
वस्त्र: संभव हो तो आज शाम की आरती में हरे रंग के वस्त्र पहनें।
भोग: माँ को शक्कर या मिश्री का भोग लगाएं और फिर उसे परिवार में बांटें।
माला: इन मंत्रों का जाप रुद्राक्ष या चंदन की माला से करना अधिक फलदायी होता है।