सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। अमूमन लोग साल में केवल दो नवरात्रों (चैत्र और शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार साल में दो 'गुप्त नवरात्रि' भी आती हैं। आज, यानी 15 जुलाई 2026 से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है।
सामान्य नवरात्रि में जहाँ मां दुर्गा के 9 रूपों की सार्वजनिक पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र, कठिन साधना और 10 दिव्य महाविद्याओं की आराधना गुप्त रूप से की जाती है। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं, शत्रु बाधा और असाध्य रोग पल भर में समाप्त हो जाते हैं।
आइए जानते हैं कि आज घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त क्या है और इस नवरात्रि की क्या खास मान्यताएं हैं।
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिकों, साधकों और अघोरियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा बटोरने का समय होता है। लेकिन गृहस्थ परिवार के लोग भी यदि मानसिक सुख, शांति और गुप्त शत्रुओं पर विजय पाना चाहते हैं, तो वे सात्विक रूप से मां की पूजा कर सकते हैं।
इस नवरात्रि का सबसे बड़ा नियम यह है कि आप जो भी साधना, मंत्र जाप या उपाय कर रहे हैं, उसकी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होनी चाहिए। आपकी पूजा जितनी 'गुप्त' रहेगी, उसका फल उतना ही अधिक और तीव्र होगा।
आज प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के लिए दो बेहद शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। आप अपनी सुविधानुसार इनमें से किसी भी समय घटस्थापना कर सकते हैं:
प्रातः काल (सुबह का मुहूर्त): सुबह 05:36 बजे से सुबह 07:45 बजे तक (यह कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है)।
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर का समय): दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक (यदि सुबह मिस हो जाए, तो इस समय स्थापना की जा सकती है)।
गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों में प्रतिदिन मां भगवती के इन 10 तांत्रिक स्वरूपों की गुप्त आराधना की जाती है:
मां काली: शत्रुओं का नाश और भय से मुक्ति दिलाने वाली।
मां तारा: घोर संकटों से तारने वाली और मोक्ष देने वाली।
मां त्रिपुर सुंदरी: सौंदर्य, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की देवी।
मां भुवनेश्वरी: पूरे ब्रह्मांड पर आधिपत्य रखने वाली और वैभव देने वाली।
मां छिन्नमस्ता: अहंकार का नाश करने वाली तीव्र शक्ति।
मां त्रिपुर भैरवी: विनाशक शक्तियों को शांत करने वाली।
मां धूमावती: दरिद्रता और दुखों को दूर करने वाली वृद्धा स्वरूप।
मां बगलामुखी: वाणी पर नियंत्रण, कोर्ट-कचहरी और शत्रुओं को स्तंभित करने वाली।
मां मातंगी: कला, संगीत और ज्ञान की देवी।
मां कमला: साक्षात् लक्ष्मी स्वरूप, जो अपार धन-धान्य देती हैं।
यदि आप तंत्र साधना नहीं कर रहे हैं, तो एक सामान्य भक्त के रूप में इस प्रकार पूजा कर सकते हैं:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं।
यदि कलश स्थापना कर रहे हैं, तो मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और कलश स्थापित करें।
मां को लाल फूल, चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
गुप्त नवरात्रि के दौरान रोज़ाना 'दुर्गा चालीसा' या 'सप्तश्लोकी दुर्गा' का पाठ करें।
लौंग और बताशे का भोग लगाएं।
गुप्त नवरात्रि का यह समय केवल कर्मकांड का नहीं, बल्कि अपने भीतर की मानसिक ऊर्जा को मजबूत करने का है। यदि आप किसी मानसिक तनाव, नौकरी में चल रही पॉलिटिक्स या अज्ञात डर से परेशान हैं, तो इन 9 दिनों में मां दुर्गा के सामने अपनी समस्याओं को मौन रहकर कहें। याद रखें, भक्ति जितनी शांत और गुप्त होगी, उसका प्रभाव उतना ही गहरा होगा।