नई दिल्ली/काशी: आज 22 मार्च 2026, रविवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। आज का दिन आदि-शक्ति के माँ कुष्मांडा स्वरूप को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान (ईषत हंसी) से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें 'आदिशक्ति' कहा जाता है। माँ कुष्मांडा का निवास सूर्य लोक के भीतर माना जाता है, इसीलिए इनकी कांति और आभा सूर्य के समान देदीप्यमान है।
माँ कुष्मांडा को 'अष्टभुजा धारी' कहा जाता है। इनकी भक्ति से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह शारीरिक व्याधियों और असाध्य रोगों को दूर करने वाली मानी गई हैं। विशेषकर रविवार का संयोग होने के कारण, आज इनकी पूजा से सूर्य जनित दोष और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं (जैसे नेत्र रोग, त्वचा रोग और हृदय संबंधी विकार) में लाभ मिलता है।
यदि आप लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आज शाम लाल चंदन की माला से इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र: "ॐ ह्रीं कुष्माण्डायै जगत्प्रसूत्यै नमः॥"
लाभ: शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और जीवनी शक्ति (Immunity) बढ़ती है।
मंत्र: "या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
लाभ: तनाव और मानसिक अवसाद से मुक्ति मिलती है।
माँ के आठों हाथों में अमृत कलश और जप माला है, जो ज्ञान और अमरता का प्रतीक है।
मंत्र: "ऐं ह्रीं देव्यै नमः॥"
लाभ: एकाग्रता बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है।
मंत्र: "ॐ कुष्माण्डायै नम:॥"
लाभ: जीवन में आने वाली अचानक बाधाओं और शत्रुओं से रक्षा होती है।
शाम की आरती से पहले इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माँ का ध्यान करें।
मंत्र: "सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"
प्रिय रंग (Orange): आज शाम की पूजा में नारंगी रंग के वस्त्र पहनें। यह रंग अग्नि और शुद्धता का प्रतीक है।
विशेष भोग: माँ कुष्मांडा को कुम्हड़े (पेठा) की बलि या पेठे की मिठाई का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा मालपुआ का भोग भी लगाया जा सकता है।
दीपक: आज शाम कपूर के साथ 2 लौंग जलाकर आरती करें, इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।