नई दिल्ली: शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस बार 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन 'कलश स्थापना' या 'घटस्थापना' का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, कलश को भगवान गणेश और ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए, शुभ मुहूर्त से पहले ही इन 10 आवश्यक सामग्रियों को जुटा लेना फलदायी होता है।
मिट्टी का कलश और ढक्कन: शुद्ध मिट्टी का कलश सबसे उत्तम माना जाता है। यदि मिट्टी का न हो, तो तांबे या पीतल के कलश का उपयोग करें।
जौ (जवारे) बोने के लिए मिट्टी का पात्र: एक चौड़ा मिट्टी का पात्र जिसमें नवरात्रि के पहले दिन जौ बोए जाते हैं।
साफ मिट्टी और जौ: खेत की शुद्ध मिट्टी और साफ किए हुए जौ के बीज।
गंगाजल और शुद्ध जल: कलश को भरने के लिए।
आम या अशोक के पत्ते: कलश के मुख पर सजाने के लिए 5 या 7 पत्ते।
नारियल (जटा वाला): कलश के ऊपर रखने के लिए पानी वाला नारियल।
लाल चुनरी और कलावा (मौली): नारियल को लपेटने और कलश के गले में बांधने के लिए।
सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज): कलश के नीचे रखने के लिए या कलश में डालने के लिए।
पंचरत्न या सिक्का: कलश के जल में डालने के लिए एक सुपारी, सिक्का और अक्षत।
लाल या पीला कपड़ा: चौकी पर बिछाने के लिए साफ सूती या रेशमी कपड़ा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार नवरात्रि के पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करने के लिए सभी सामग्रियों का शुद्ध और पहले से व्यवस्थित होना अनिवार्य है। आज (सोमवार) का दिन इन पवित्र वस्तुओं की खरीदारी के लिए बेहद शुभ है।