वह भारी नहीं है, वह मेरा भाई है

सन 1945 का वह काला दिन, जब जापान के नागासाकी पर परमाणु हमला हुआ, मानव इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है।
9 अगस्त 1945 को हुई इस बमबारी ने न केवल एक शहर को राख कर दिया, बल्कि अनगिनत परिवारों, मासूम बच्चों और इंसानी रिश्तों को भी हमेशा के लिए जख़्म दिए।

उसी विनाश के बीच खींची गई एक तस्वीर आज भी इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। यह तस्वीर करीब 10 साल के एक लड़के की है। उसकी पीठ पर उसका छोटा भाई बंधा हुआ था, जो अब इस दुनिया में नहीं था। वह बच्चा चुपचाप खड़ा था, अपनी बारी का इंतजार करता हुआ ताकि अपने भाई का अंतिम संस्कार कर सके।

एक सैनिक ने जब उसे देखा तो हैरान रह गया। उसने धीरे से बच्चे से कहा—
“तुम बहुत थके लग रहे हो, इसे ज़मीन पर रख दो।”

लेकिन उस मासूम ने जो उत्तर दिया, उसने हर सुनने वाले का दिल पिघला दिया। उसने कहा—
“वह भारी नहीं है… वह मेरा भाई है।”

उस एक वाक्य ने पूरी दुनिया को सिखाया कि रिश्ते, मोहब्बत और जिम्मेदारी का बोझ कभी भारी नहीं होता।

तब से यह तस्वीर और यह वाक्य जापान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एकता, भाईचारे और त्याग का प्रतीक बन गया।

हमें इससे क्या सीखना चाहिए?

👉 अगर आपका भाई या बहन गिर जाए, तो उसे उठाइए।
👉 अगर कोई दोस्त थक जाए, तो उसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ाइए।
👉 अगर कोई गलती कर दे, तो उसे माफ़ कीजिए।
👉 अगर वह कमजोर है, तो उसे संभालिए।
👉 और अगर पूरी दुनिया उसे छोड़ भी दे, तो उसे अपने कंधों पर उठा लीजिए।

क्योंकि वह भारी नहीं है…
वह आपका भाई है,
वह आपकी बहन है,
वह आपका परिवार है।

यही तो दोस्ती और रिश्तों का असली मतलब है—
चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, हमें एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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