श्री गणेश चिंतन

श्री गणेश चिंतन

एकदन्तं शूर्पकर्ण गजवक्त्रं चतुर्भुजम्।
पाशाड़कुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्।।

ध्यायेद् गजाननं देवं तप्तकाञ्चनसंनिभम्।
चतुर्भुजं महाकायं सर्वाभरणभूषितम्।।

दन्ताक्षमालापरशुं पूर्णमोदकधारिणम्।
मोदकासक्ताशुण्डाग्रमेकदन्तं विनायकम्।।

भगवान गणेश, जिनके पास एक दाँत, विशाल कान, हाथी के जैसा मुख और चार भुजाएँ है, जो अपने हाथों में पाश और अंकुश धारण करते हैं, ऐसे सिद्धि विनाय देव का ध्यान करे। जिनकी अभंग कान्ति तपाये हुए स्वर्ण के समान दीप्तिमय है, जो चार भुजाधारी, विशालकाय और सब प्रकार के आभूषणों से विभूषित हैं, उन गजानन देव का ध्यान करे। जो अपने हाथों में दन्त, अक्षमाला, परशु और मोदक से भरा हुआ पात्र धारण करते हैं, जिनकी सूँडूका अग्रभाग लड्डू पर लगा हुआ है, उन एकदन्त विनायक का मैं ध्यान करता हूँ।

 




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