श्री सत्यनारायण जी आरती

महत्वपूर्ण जानकारी

  • जय लक्ष्मी राम विष्णु देवता के लिए एक हिंदू धार्मिक गीत है। हालांकि यह गीत एक हिंदी भाषा की रचना है, लेकिन इसे भारतीय मूल के कई हिंदुओं ने अपनी मूल भाषा की परवाह किए बिना गाया है। हिंदू पूजा के एक रूप आरती के समय पूरी मण्डली द्वारा प्रार्थना गाई जाती है।

ओम् जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा,
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ।।

रत्न जडित सिंघासन, अद्भुत छबि राजे,
नारद करत निरांजन, घंटा ध्वनि बाजे । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।।१।।

प्रकट भये कलि कारन, द्विज को दरस दियो,
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।।२।।

दुर्बल भील कराल, जिनपर कृपा करी,
चंद्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपति हरी । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।।३।।

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीनी,
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्हीं । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ।।४।।

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो,
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनके काज सरयो । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।।५।।

ग्वाल बाल संग राजा, बन में भक्ति करी,
मन वांछित फल दीन्हो, दीनदयाल हरी । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।।६।।

चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा,
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा । ओम् जय लक्ष्मी रमणा ...।। ७ ।।

श्री सत्यानरायण जी की आरती जो कोई नर गावे,
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे । ओम् जय लक्ष्मीरमणा ।।८।। 




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