मकर संक्रांति 2026: हरिद्वार और ऋषिकेश में उमड़ा आस्था का सैलाब; 'ग्रीन मेला' और सुरक्षा पर विशेष जोर

मकर संक्रांति 2026: हरिद्वार और ऋषिकेश में उमड़ा आस्था का सैलाब; 'ग्रीन मेला' और सुरक्षा पर विशेष जोर

हरिद्वार/ऋषिकेश, 12 जनवरी 2026: जैसे ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं, वैसे ही उत्तराखंड की पवित्र नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। 14-15 जनवरी को पड़ने वाली मकर संक्रांति के अवसर पर होने वाले माघ मेला स्नान के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु गंगा तट की ओर पहुंच रहे हैं।

इस वर्ष अनुमान है कि 20 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचेंगे। इसे देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन ने इस बार ‘ग्रीन मेला’ की थीम और कड़े सुरक्षा प्रबंध लागू किए हैं।


मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व

मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो शीत अयन के अंत और शुभ काल की शुरुआत को दर्शाता है। मान्यता है कि माघ मास में गंगा स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे पुण्य व मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हरिद्वार का हर की पौड़ी और ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट इस पावन स्नान के मुख्य केंद्र बने हुए हैं।


‘ग्रीन मेला’ पहल: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड सरकार ने 2026 के माघ मेले को ‘जीरो प्लास्टिक जोन’ घोषित किया है।

🌱 मुख्य व्यवस्थाएँ:

🚫 प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

घाटों के 5 किलोमीटर के दायरे में पॉलीथिन, डिस्पोजेबल कप और सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।

♻️ जैविक कचरा प्रबंधन

पूरे मेला क्षेत्र में ‘ग्रीन वॉलंटियर्स’ तैनात किए गए हैं, जो कचरे को अलग-अलग करके उसके निस्तारण की व्यवस्था कर रहे हैं।

🚌 ईको-ट्रांसपोर्ट सुविधा

पहली बार श्रद्धालुओं को पार्किंग से घाटों तक लाने के लिए इलेक्ट्रिक शटल बसें चलाई गई हैं, जिससे प्रदूषण कम किया जा सके।


सुरक्षा और यातायात व्यवस्था

20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा खाका तैयार किया है:

👮 भीड़ नियंत्रण

मेला क्षेत्र को 15 जोन और 40 सेक्टर में बांटा गया है।
5,000 से अधिक पुलिसकर्मी, एसडीआरएफ और जल पुलिस को तैनात किया गया है।

🚁 ड्रोन से निगरानी

AI तकनीक से लैस ड्रोन के माध्यम से भीड़ की स्थिति और संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

🚧 यातायात डायवर्जन

आज से 15 जनवरी की शाम तक दिल्ली-हरिद्वार और देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

🚑 स्वास्थ्य सेवाएँ

सभी प्रमुख घाटों और प्रवेश द्वारों पर 24 घंटे मेडिकल कैंप और एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।


यात्रियों के लिए प्रशासन की सलाह

  • श्रद्धालुओं से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की गई है।

  • 14 जनवरी को सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंचने की सलाह दी गई है ताकि भारी भीड़ से बचा जा सके।

  • हिमालयी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड को देखते हुए गरम कपड़े साथ रखने की सलाह दी गई है।


निष्कर्ष

इस वर्ष का माघ मेला 2026 न केवल आस्था और श्रद्धा का महापर्व है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है। हरिद्वार और ऋषिकेश एक बार फिर आस्था, व्यवस्था और संस्कृति के अद्भुत संगम के साक्षी बन रहे हैं।



प्रश्न और उत्तर



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