आशा दशमी व्रत 2026: 24 जुलाई को है आशा दशमी, जानिए भविष्य पुराण अनुसार उद्यापन विधि, मंत्र और संपूर्ण पूजा नियम

हिंदू धर्म में व्रत और त्यौहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये जीवन में सकारात्मकता, आशा और उमंग का संचार करते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत कल्याणकारी पर्व है 'आशा दशमी व्रत' (Asha Dashami Vrat)। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने से व्यक्ति की अधूरी आशाएं पूरी होती हैं और जीवन में कभी निराशा का सामना नहीं करना पड़ता।

शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है, लेकिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं - साल 2026 में आषाढ़ आशा दशमी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और भविष्य पुराण में वर्णित प्रामाणिक उद्यापन विधि

📅 आशा दशमी व्रत 2026: सटीक तिथि व शुभ मुहूर्त (Date & Timings)

ड्रिक पंचांग की गणना के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का समय इस प्रकार है:

  • दशमी तिथि प्रारंभ: 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे से

  • दशमी तिथि समाप्त: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे तक

  • आशा दशमी मुख्य व्रत तारीख (उदयातिथि अनुसार): 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार)

  • प्रातः पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 05:40 बजे से सुबह 09:10 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक

  • राहुकाल (पूजा से बचें): सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक

🌺 आशा दशमी का सिद्ध प्रार्थना मंत्र व भावार्थ

आशा दशमी के दिन दसों दिशाओं की आशा देवियों का ध्यान करते हुए इस पवित्र श्लोक का जाप करना चाहिए:

आशाश्चाशाः सदा सन्तु सिद्धीयन्तां मे मनोरथाः।

भवतीनां प्रसादेन सदा कल्याणमस्तित्वति॥

भावार्थ: "हे आशा देवियों! मेरी आशाएं सदा पूर्ण करें, मेरे सभी मनोरथ सिद्ध करें, आप सभी देवियाँ कृपा करके मेरा कल्याण करें।"

📿 भविष्य पुराण अनुसार आशा दशमी व्रत उद्यापन विधि (Udyapan Vidhi)

भविष्य पुराण के उत्तरपर्व के 64वें अध्याय में आशा दशमी व्रत के उद्यापन का स्पष्ट और प्रामाणिक विधान मिलता है:

  1. आशा देवियों का निर्माण व पूजन: उद्यापन के दिन साधक को अपनी समर्थता के अनुसार घर के आंगन में स्वर्ण (सोने), रजत (चांदी) अथवा पिष्टातक (चावल के आटे/रंगों की रंगोली) द्वारा आशा देवियों की आकृति बनाकर उनका विधिवत पूजन-अर्चन करना चाहिए।

  2. मनोकामना पूर्ति हेतु प्रार्थना: दसों आशा देवियों के सामने दीप जलाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। देवियों के साथ-साथ समस्त नक्षत्रों, ग्रहों, तारागणों, नक्षत्र-मातृकाओं, भूत-प्रेत तथा विनायकों (गणेश जी) से भी अपने अभीष्ट की सिद्धि हेतु प्रार्थना करें।

  3. षोडशोपचार पूजन: तत्पश्चात धूप, दीप, गंध, पुष्प, फल, वस्त्र और पवित्र जल से अभिषेक करके देवियों का पूजन करें।

  4. रात्रि जागरण व संगीत: उद्यापन की रात्रि में सुहागिन स्त्रियों को नृत्य, गायन और भजन-कीर्तन करते हुए भक्तिपूर्वक जागरण करना चाहिए।

  5. ब्राह्मण दान व क्षमा प्रार्थना: अगले दिन प्रातःकाल किसी वेदज्ञ ब्राह्मण को कुमकुम, अक्षत, तांबूल (पान का बीड़ा) और यथाशक्ति दक्षिणा सहित पूजा की समस्त सामग्री सादर अर्पित करें। इसके बाद पूजा में हुई जाने-अनजाने की भूल-चूक के लिए क्षमा-प्रार्थना करके उन्हें विदा करें।

  6. प्रसाद वितरण: अंत में अपने बंधु-बांधवों और परिवार के सदस्यों के साथ स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

🌸 इस व्रत का विशेष माहात्म्य (Significance)

धर्मग्रंथों में प्राप्त आशा दशमी के माहात्म्य से यह सिद्ध होता है कि दुर्लभ से दुर्लभ मनोरथों की पूर्ति के लिए आशा दशमी व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी, आरोग्यप्रद और श्रेयस्कर माना गया है।




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