नई दिल्ली/हरिद्वार: आज 15 मार्च 2026 को देश भर में पापमोचिनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी अपने नाम के अनुरूप ही मनुष्य के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का 'मोचन' यानी नाश करने वाली मानी जाती है। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि से ठीक पहले आने वाली यह एकादशी भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का एक दिव्य अवसर है।
आज के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप (शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए) की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस स्वरूप का ध्यान करने से भक्त के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का संचार होता है।
पीला रंग: भगवान को पीले फूल, पीले फल और केसर मिश्रित पंचामृत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मंत्र शक्ति: आज के दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है।
एकादशी के दिन चावल का सेवन न करने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण हैं:
धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि मेधा के शरीर के अंश से चावल (अन्न) की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए एकादशी पर चावल खाना उनके अंश का उपभोग माना जाता है।
वैज्ञानिक कारण: एकादशी के दिन चंद्रमा की स्थिति का जल पर गहरा प्रभाव होता है। चावल में जल की मात्रा अधिक होती है, जिसके सेवन से मन चंचल हो सकता है और उपवास के दौरान एकाग्रता भंग हो सकती है।
प्राचीन समय में मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए 'मंजुघोषा' अप्सरा आई थी। मोह के कारण ऋषि का मार्ग भटक गया, परंतु जब उन्हें अपनी भूल का ज्ञान हुआ, तो उन्होंने भगवान विष्णु की शरण ली। प्रभु के आदेशानुसार उन्होंने 'पापमोचिनी एकादशी' का विधि-विधान से व्रत किया, जिससे वे अपने दोषों से मुक्त होकर पुनः ओजस्वी हो गए।
आज रविवार भी है, जो सूर्य देव का दिन है। एकादशी और रविवार के मेल से आज का महत्व और बढ़ गया है।
विशेष उपाय: आज सूर्य देव को अर्घ्य देते समय उसमें थोड़े काले तिल और लाल फूल डालें। यह स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रामबाण माना जाता है।