अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत की वो प्राचीन धरोहर, जिसने पूरी दुनिया को सिखाया सेहतमंद जीने का हुनर

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत की वो प्राचीन धरोहर, जिसने पूरी दुनिया को सिखाया सेहतमंद जीने का हुनर

महत्वपूर्ण जानकारी

  • रविवार, 21 जून 2026
  • पहली बार मनाया गया: 21 जून 2015

'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' अर्थात अपने मन की चंचलता पर नियंत्रण पाना ही योग है। सदियों पहले भारत की पवित्र भूमि और हमारे वेदों से उपजी यह ध्यानमयी पद्धति आज सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की जीवनशैली बन चुकी है। हर साल 21 जून का दिन पूरी दुनिया में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' (International Yoga Day) के रूप में एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। इस दिन दुनिया के कोने-कोने से लोग सुबह-सुबह खुले आसमान के नीचे आकर योग, प्राणायाम और ध्यान के जरिए अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करते हैं।

1. कैसे हुई शुरुआत? (भाषण जिसने इतिहास बदल दिया)

इस वैश्विक आंदोलन की नींव रखने का पूरा श्रेय भारत के दूरदर्शी प्रयासों को जाता है:

  • PM मोदी की वैश्विक पहल: 27 सितंबर 2014 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने ऐतिहासिक भाषण के दौरान दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था।

  • 21 जून 2015 - पहला इतिहास: भारत के इस प्रस्ताव को दुनिया के रिकॉर्ड 177 देशों का समर्थन मिला और इसके ठीक बाद 21 जून 2015 को दुनिया ने पहली बार आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया।

2. "यह सिर्फ व्यायाम नहीं, प्रकृति से जुड़ना है" — नरेंद्र मोदी

‘‘आयोग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है। मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है- विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है। तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।‘‘

3. "अनाथ से विश्वगुरु बनने का सफर" — श्री श्री रविशंकर

‘‘किसी भी दर्शन, धर्म या संस्कृति के लिए राज्य के संरक्षण के बिना जीवित रहना बहुत मुश्किल है। योग लगभग एक अनाथ की तरह अब तक अस्तित्व में था। अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्वभर में फैलाएगी।’’

The Divine India संदेश:

योग किसी एक धर्म या सीमा में बंधा हुआ नहीं है; यह तो स्वयं को स्वस्थ और संतुलित रखने का एक सार्वभौमिक विज्ञान है। इस योग दिवस पर केवल एक दिन के लिए नहीं, बल्कि हर दिन अपने व्यस्त जीवन से 20 मिनट योग के लिए निकालने का संकल्प लें।



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