पवित्र नगरी हरिद्वार केवल अपनी पावन गंगा आरती और प्राचीन अखाड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने दिव्य आश्रमों और उत्कृष्ट वास्तुकला से सजे आधुनिक मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। इसी पावन श्रृंखला में हरिद्वार-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 58) पर भूपतवाला क्षेत्र में स्थित है— दूधाधारी बर्फानी मंदिर।
दूधाधारी बर्फानी बाबा आश्रम के भीतर बना यह मंदिर अपनी अलौकिक वास्तुकला और शांत वातावरण के कारण हरिद्वार के सबसे सुंदर और भव्य मंदिरों में से एक माना जाता है।
यह पावन धाम पूरी तरह से एक महान सिद्ध संत की आध्यात्मिक यात्रा को समर्पित है:
नाम के पीछे की कहानी: इस भव्य मंदिर का नाम परम पूज्य स्वामी दूधाधारी बर्फानी महाराज (दूधाधारी बर्फानी बाबा) के नाम पर रखा गया है। लोक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, बाबाजी ने एक अत्यंत कठिन और सात्विक जीवन जिया था; उन्होंने अपनी साधना के दौरान अन्न का पूरी तरह त्याग कर दिया था और वे केवल दूध (दूध-आहारी या दूधाधारी) का ही सेवन करते थे।
चमत्कार और सिद्धियाँ: माना जाता है कि इसी स्थान पर सिद्ध बाबा दूधाधारी ने एक पवित्र शिवलिंग की स्थापना की थी और कठिन तपस्या कर कई सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। बाद में, उनकी स्मृति और सम्मान में इस भव्य मंदिर परिसर का निर्माण किया गया।
ताजमहल जैसी भव्यता: दूर से देखने पर यह मंदिर किसी राजसी महल जैसा प्रतीत होता है। पूरा मंदिर परिसर उच्च गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर (White Marble) से बनाया गया है। जब सुबह और दोपहर की सुनहरी धूप इस संगमरमर पर पड़ती है, तो मंदिर की चमक देखने लायक होती है।
रामायण के जीवंत प्रसंग: मंदिर की दीवारों, स्तंभों और गुंबदों पर की गई बारीक नक्काशी (Carvings) इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। पत्थरों को काटकर रामायण महाकाव्य के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों, युद्ध दृश्यों और देवी-देवताओं के चित्रों को बहुत ही सुंदर ढंग से उकेरा गया है।
मुख्य मंदिर परिसर के भीतर कई छोटे-छोटे लेकिन अत्यंत सुंदर गर्भगृह हैं:
राम-सीता और हनुमान मंदिर: यहाँ भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ संकटमोचन हनुमान जी की अत्यंत मनमोहक मूर्तियाँ स्थापित हैं। इन मूर्तियों की सुंदरता और उनके वस्त्रों की छटा भक्तों का मन मोह लेती है।
शिव-पार्वती दरबार: आश्रम की आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े होने के कारण यहाँ महादेव और माता पार्वती का भी एक सुंदर दरबार सजा हुआ है, जहाँ भक्त जलाभिषेक और ध्यान करते हैं।
हरे-भरे बगीचे: मंदिर के चारों ओर बने सुंदर और साफ-सुथरे बगीचे (Lush Green Gardens) यहाँ की हवा को शुद्ध और वातावरण को अत्यंत शांत बनाए रखते हैं।
स्थिति: यह मंदिर हरिद्वार के मुख्य केंद्र और प्रसिद्ध 'हर की पौड़ी' से मात्र 4 किलोमीटर दूर भूपतवाला (मोतीचूर के पास) में ऋषिकेश जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है।
समय: मंदिर प्रतिदिन सुबह 06:00 बजे से रात 08:00 बजे तक खुला रहता है। यहाँ प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है।
सड़क मार्ग: हर की पौड़ी या हरिद्वार रेलवे स्टेशन से आप स्थानीय ऑटो, ई-रिक्शा या निजी कैब के माध्यम से आसानी से 10-15 मिनट में यहाँ पहुँच सकते हैं।
