ज्योतिष 2026: देवगुरु बृहस्पति की सीधी चाल शुरू - इन 4 राशियों की बंद किस्मत का खुलेगा ताला

ज्योतिष 2026: देवगुरु बृहस्पति की सीधी चाल शुरू - इन 4 राशियों की बंद किस्मत का खुलेगा ताला

नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026: ज्योतिष शास्त्र में सबसे शुभ और लाभकारी माने जाने वाले ग्रह, देवगुरु बृहस्पति (Jupiter), आज अपनी वक्री (Retrograde) अवस्था को समाप्त कर वृषभ राशि (Taurus) में मार्गी (Direct) हो रहे हैं। गुरु का सीधी चाल चलना ब्रह्मांडीय ऊर्जा में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाता है। जब गुरु मार्गी होते हैं, तो वे अपनी पूर्ण शक्ति के साथ ज्ञान, धन, संतान और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं।

गुरु का वृषभ राशि में प्रभाव: स्थिरता और समृद्धि का योग

वृषभ एक पृथ्वी तत्व की राशि है जो संचित धन और परिवार को दर्शाती है। गुरु का यहाँ मार्गी होना आर्थिक मंदी को दूर करने और निवेश में भारी लाभ मिलने का संकेत है। विशेष रूप से बैंकिंग, शिक्षा, न्याय और धार्मिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं होगा।

इन 4 राशियों के लिए शुरू होगा 'स्वर्णिम काल' (Top 4 Beneficiaries)

  1. वृषभ (Taurus): गुरु आपकी ही राशि में मार्गी हो रहे हैं। अब तक आपके जीवन में जो मानसिक भ्रम और काम में देरी हो रही थी, वह समाप्त होगी। आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि होगी और विवाह के योग भी बनेंगे।

  2. कन्या (Virgo): आपके लिए भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। लंबी दूरी की यात्राएं और उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे। अगर आपका कोई कानूनी मामला अटका हुआ था, तो वह आपके पक्ष में हल हो सकता है।

  3. वृश्चिक (Scorpio): आपके सातवें भाव (साझेदारी) में गुरु की सीधी चाल व्यापार में नई पार्टनरशिप और विस्तार के योग बनाएगी। वैवाहिक जीवन की परेशानियाँ दूर होंगी और नए व्यापारिक अनुबंध प्राप्त होंगे।

  4. मकर (Capricorn): आपके लिए संतान सुख और प्रेम संबंधों में सुधार का समय है। आपकी रचनात्मक क्षमता बढ़ेगी और स्टॉक मार्केट या लॉटरी से अचानक धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं।

सावधानी और उपाय (Remedies for Success)

गुरु की कृपा को और अधिक बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय करना लाभकारी होगा:

  • उपाय: आज के दिन माथे पर केसर का तिलक लगाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और चने की दाल या पीले फल का दान करें।

  • सावधानी: अति-उत्साह में आकर बड़ा निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह अवश्य लें।

नोट: यह लेख शास्त्रों और परंपराओं पर आधारित है। व्यक्तिगत परिस्थितियों के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।



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