कबीर रेख सिन्दूर

Kabir Rekh Sindoor

कबीर रेख सिन्दूर की काजल दिया न जाई।
नैनूं रमैया रमि रहा  दूजा कहाँ समाई ॥

अर्थ: कबीर  कहते हैं कि जहां सिन्दूर की रेखा है – वहां काजल नहीं दिया जा सकता. जब नेत्रों में राम विराज रहे हैं तो वहां कोई अन्य कैसे निवास कर सकता है ?

You can Read in English...

आरती

मंत्र

चालीसा

आप को इन्हें भी पढ़ना चाहिए हैं :

Other Kabir Dohe Blog of Dohe

आपको इन्हे देखना चाहिए

आगामी त्योहार और व्रत 2021

आज की तिथि (Aaj Ki Tithi)

ताज़ा लेख

इन्हे भी आप देख सकते हैं

X