अमरनाथ यात्रा 2022

अमरनाथ यात्रा 2022

महत्वपूर्ण जानकारी

  • प्रारंभ तिथि: सोमवार, 27 जून 2022।
  • यात्रा समाप्ति तिथि: गुरुवार, 11 अगस्त 2022।
  • इस वर्ष यात्रा की अवधि केवल 56 दिन है।
  • पहलगाम-चंदनवारी ट्रैक और सोनमर्ग-बालटाल ट्रैक प्रत्येक को 2022 के लिए श्री अमानाथ यात्रा कार्यक्रम के प्रत्येक दिन यत्रिस (तीर्थयात्रियों) के लिए 7500 पंजीकरण की अनुमति होगी।
  • अगर आप श्री अमरनाथजी की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं तो आपको इन बातों को ध्यान से पढ़ना चाहिए
  • अधिक अमरनाथ यात्रा अनुसूची

अमरनाथ की यात्रा हिन्दू को प्रमुख धार्मिक यात्रा है। अमरनाथ की यात्रा भगवान शिव के प्रकृतिक रूप से बने शिव लिंग के दर्शन करने के लिए की जाती है। यह यात्रा अत्यन्त कठिन है। अमर नाथ यात्रा पर जाने के भी दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से इन दोनों मार्गो से आगे की यात्रा पैदल होती है। पहलगाम से जानेवाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है और यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है। इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने जोखिम पर यात्रा करते है। रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार जिम्मेदारी नहीं लेती है।

पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर है तथा यहीं से तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है। पहलगाम के बाद पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से 8 किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है।

चंदनबाड़ी से 14 किलोमीटर दूर शेषनाग में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं।

शेषनाग से पंचतरणी 8 मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं। महागुणास चोटी से पंचतरणी तक का सारा रास्ता उतराई का है। यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों से ढका है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहाँ सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं।

अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल 8 किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

यात्रा के लिए तैयारी
इस यात्रा क दौरान अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, जरूरी दवाईयां और हल्का स्नैक्स रखें। टाॅर्च, माचिस, पावर बैंक, पाॅलीथिन बैग आदि रखें और यात्रा के लिए मिले निर्देशों का पालन जरूर करें।






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