ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्: मंत्र का गूढ़ अर्थ

प्राचीन एवं रहस्यमय मन्त्र "ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते |" पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते || ॐ शांतिः शांतिः शांतिः |" एक गहरा और अध्यात्मिक अर्थ रखता है, जो पूर्णता, संपूर्णता और अस्तित्व के शाश्वत चक्र के सार को समाहित करता है। यह मंत्र, जिसे अक्सर पूर्णमदह मंत्र कहा जाता है, प्राचीन ग्रंथों का खजाना है और एक संदेश देता है जो समय और स्थान की सीमाओं को पार करता है।

मंत्र:

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम पूर्णात् पूर्णमुदच्यते |
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ||
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः |

अनुवाद:

"ओम, वह पूर्ण है; यह पूर्ण है। पूर्णता से, पूर्णता उत्पन्न होती है।
जब पूर्णता में से पूर्णता निकाल दी जाती है तो पूर्णता ही शेष रह जाती है।
ओम, शांति, शांति, शांति।"

मंत्र को समझना

  1. संपूर्णता और पूर्णता: मंत्र की शुरुआत पूर्णता और पूर्णता के विचार की पुष्टि से होती है। इससे पता चलता है कि ब्रह्मांड में सब कुछ पहले से ही पूर्ण है, किसी चीज़ की कमी नहीं है। यह एक अनुस्मारक है कि परम वास्तविकता, ब्रह्मांडीय सार, संपूर्ण और सर्वव्यापी है।
  2. शाश्वत चक्र: मंत्र बताता है कि पूर्णता से पूर्णता कैसे उत्पन्न होती है, जो सृजन, संरक्षण और विघटन के शाश्वत चक्र का प्रतीक है। यह जीवन के निरंतर प्रवाह का प्रतिनिधित्व करता है, जहां एक रूप दूसरे को जन्म देता है, जो सभी दिव्य स्रोत की पूर्णता में निहित है।
  3. कुछ भी नहीं लिया जाता है: मंत्र खूबसूरती से बताता है कि जब पूर्णता से पूर्णता हटा दी जाती है, तब भी पूर्णता बनी रहती है। यह दर्शाता है कि ब्रह्मांड अनंत है, और प्रत्येक भाग आपस में जुड़ा हुआ है, जिससे ब्रह्मांडीय पूर्णता कभी कम नहीं होती।

शांति: मंत्र का समापन "ओम शांति" के शक्तिशाली जाप के साथ होता है, जिसमें तीन बार शांति का आह्वान किया जाता है। यह इस विचार को पुष्ट करता है कि शाश्वत पूर्णता को पहचानने से आंतरिक शांति, शांति और सद्भाव मिलता है।

महत्व

पूर्णमदह मंत्र एक गहन दार्शनिक कथन है, जो सभी अस्तित्वों के अंतर्संबंध, ब्रह्मांड की शाश्वत प्रकृति और जीवन के हर पहलू में व्याप्त परम पूर्णता पर जोर देता है। यह हमें याद दिलाता है कि अस्तित्व के उतार-चढ़ाव में भी, स्रोत, जो संपूर्ण और अपरिवर्तनीय है, हमारे भीतर और आसपास रहता है।

जप एवं मनन

पूर्णमदह मंत्र का समझ और भक्ति के साथ जाप करने से हमें दिव्य स्रोत से जुड़ने में मदद मिल सकती है और हमें आंतरिक शांति और संतुष्टि की अनुभूति हो सकती है। इसके अर्थ पर विचार करने से हम खुद को वृहत्तर ब्रह्मांडीय व्यवस्था के साथ जोड़ सकते हैं और जीवन के सृजन और विघटन के जटिल नृत्य की सुंदरता की सराहना कर सकते हैं।

अक्सर विखंडन और अपूर्णताओं से भरी दुनिया में, पूर्णमदह मंत्र हमें हमारे भीतर और आसपास अंतर्निहित पूर्णता की याद दिलाता है। यह हमें इस शाश्वत पूर्णता के एक हिस्से के रूप में जीवन को अपनाने, भौतिक दुनिया की सीमाओं को पार करने और इसके द्वारा प्रदान किए गए गहन ज्ञान में सांत्वना खोजने के लिए आमंत्रित करता है।









2024 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार











Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं