लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा

Lakshmi Panchami Vrat Katha

मां लक्ष्मी का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इन्हें धन की देवी माना जाता है. मां लक्ष्मी की जिस व्यक्ति पर कृपा होती है उसे जीवन में किसी सुख की कमी नहीं रहती. होली, बसोड़ा, शनि त्रयोदिशी, लक्ष्‍मी पंचमी समेत मार्च के व्रत त्‍योहार, इस दिन से शुरू होंगे 

मां लक्ष्मी का दिन शुक्रवार का होता है, पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन मां का पूजन करने से वे बेहद प्रसन्न होती हैं. इसी कारण इस दिन को लक्ष्मी पंचमी या श्री पंचमी भी कहा जाता है.

व्रत कथा

एक बार मां लक्ष्मी देवताओं से रूठ गईं. मां लक्ष्मी के जाने से देवता श्री विहीन हो गये. तब देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या की. उनका अनुसरण करते हुए अन्य देवताओं ने भी मां लक्ष्मी का उपवास रखा. देवताओं की तरह असुरों ने भी मां लक्ष्मी की उपासना की. अपने भक्तों की पुकार मां ने सुनी और वे व्रत समाप्ति के पश्चात उत्पन्न हुई, देवता फिर से श्री की कृपा पाकर धन्य हुए. मान्यता है कि यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी. यही कारण था कि इस तिथि को लक्ष्मी पंचमी के व्रत के रूप में मनाया जाने लगा.

पूजन विधि

सुबह उठकर स्नान करें. मां लक्ष्मी की वंदना करें. लक्ष्मी जी को कमल का फूल अर्पित करें. व्रत रखने का संकल्प लें. इस दिन फलाहार करें. शाम को लक्ष्मी जी का पूजन करें. सफेद चीज का भोग लगाएं.

 मां लक्ष्मी के मंत्र

महालक्ष्मी च विद्महे,
विष्णुपत्नी च धीमहि,
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्।

ॐ श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै श्रीं श्रीं ॐ नम:

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