जब भी हम उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की बात करते हैं, तो हमारे मन में वाराणसी, अयोध्या या मथुरा-वृंदावन का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन आगरा से लगभग 70 किलोमीटर दूर यमुना नदी के किनारे एक ऐसा प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर परिसर स्थित है, जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान रह जाता है। इस पावन नगरी का नाम है बटेश्वर, जिसे बटेश्वर नाथ धाम के रूप में जाना जाता है। इस ऐतिहासिक स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ यमुना नदी के घाटों पर एक कतार में 101 शिव मंदिर बने हुए हैं।
आध्यात्मिक, वास्तुकला और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बटेश्वर धाम भारत की सबसे अनमोल और प्राचीन धरोहरों में से एक है।
बटेश्वर नाम भगवान शिव के ही एक नाम 'वटेश्वरनाथ' से लिया गया है। इस प्राचीन नगरी का उल्लेख मत्स्य पुराण और महाभारत जैसे पवित्र ग्रंथों में भी मिलता है।
आम तौर पर यमुना नदी सीधी बहती है, लेकिन बटेश्वर पहुँचकर यमुना जी एक बहुत ही अनोखा और तीखा 'यू-टर्न' (U-Turn) लेती हैं, जिससे यहाँ नदी का स्वरूप अर्धचंद्राकार (क्रिसेंट शेप) हो जाता है। सनातन धर्म में ऐसी जगहों को बेहद पवित्र माना जाता है जहाँ नदी अर्धचंद्र का आकार ले। मान्यता है कि यहाँ कार्तिक पूर्णिमा या सावन के महीने में डुबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं।
बटेश्वर के मुख्य मंदिर से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प लोककथा है। पौराणिक काल में दो राजाओं ने अपनी अजन्मी संतानों का विवाह आपस में तय कर दिया था। लेकिन संयोगवश दोनों राजाओं के घर बेटियों ने जन्म लिया। एक राजा ने युद्ध के डर से अपनी बेटी का लिंग छुपाकर उसे राजकुमार की तरह पाला। जब विवाह का समय आया, तो वह राजकुमारी ग्लानि से भर गई और उसने बटेश्वर में यमुना नदी में कूदकर अपनी जान देने की कोशिश की। लोककथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे पानी से एक युवक के रूप में बाहर निकाला, जिससे दोनों राज्यों की लाज बच गई।
बटेश्वर की असली खूबसूरती इसके घाटों पर बिखरी है। 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान मराठा शासकों द्वारा निर्मित ये मंदिर सफ़ेद पत्थरों और चूने से बने हैं।
अद्भुत नजारा: जब आप घाट के एक छोर पर खड़े होकर नदी के किनारे बने दर्जनों एक जैसे मंदिर के शिखरों को देखते हैं, तो इसकी भव्यता बिल्कुल वाराणसी के घाटों जैसी प्रतीत होती है।
मुख्य बटेश्वर नाथ मंदिर: इस परिसर के मुख्य मंदिर में एक विशाल और प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जहाँ सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं।
धार्मिक पहचान के अलावा बटेश्वर का ऐतिहासिक और राजनैतिक महत्व भी बहुत बड़ा है:
शौरीपुर जैन तीर्थ: बटेश्वर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर शौरीपुर स्थित है, जिसे जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली माना जाता है। यह क्षेत्र सनातन धर्म और जैन धर्म के अद्भुत मिलन का प्रतीक है।
अटल बिहारी वाजपेयी जी का पैतृक गांव: बटेश्वर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का पैतृक गाँव है। इस मिट्टी से उनका गहरा जुड़ाव रहा है।
बटेश्वर की चर्चा इसके वार्षिक मेले के बिना अधूरी है। यहाँ सदियों से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर (अक्टूबर/नवंबर) उत्तर भारत का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। इस मेले में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान और व्यापारी हजारों ऊंटों, घोड़ों और मवेशियों की खरीद-बिक्री के लिए जुटते हैं, जो भारत की ग्रामीण संस्कृति का एक जीवंत रूप प्रस्तुत करता है।
बटेश्वर नाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से लगभग 70 किमी दूर बटेश्वर कस्बे में स्थित है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ यमुना नदी के घाट पर एक कतार में 101 प्राचीन शिव मंदिर बने हुए हैं।
बटेश्वर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर या नवंबर के महीने में) के पावन अवसर पर उत्तर भारत का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक पशु मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें ऊंटों और घोड़ों का बड़ा व्यापार होता है।
बटेश्वर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का पैतृक गाँव है। इसके अतिरिक्त, पास में स्थित शौरीपुर जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली भी है।