नई दिल्ली: आज 13 अप्रैल 2026, सोमवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की 'वरूथिनी एकादशी' मनाई जा रही है। शास्त्रों में इस एकादशी को अत्यंत कल्याणकारी और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। 'वरूथिनी' शब्द संस्कृत के 'वरूथिन' से बना है, जिसका अर्थ है— 'रक्षक' या 'कवच'। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज के दिन भगवान विष्णु के 'वराह' स्वरूप की पूजा करता है, यह व्रत उसके लिए हर संकट से ढाल बनकर रक्षा करता है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस एकादशी का फल दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के समान माना गया है।
सौभाग्य की प्राप्ति: यह व्रत व्यक्ति को राजा मांधाता की भांति स्वर्ग का अधिकारी बनाता है।
पापों का शमन: जाने-अनजाने में हुए शारीरिक और मानसिक पापों के प्रायश्चित के लिए यह सर्वश्रेष्ठ दिन है।
कष्टों से मुक्ति: वैशाख के महीने में आने के कारण, यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शांति देता है बल्कि जीवन की बाधाओं को भी दूर करता है।
पूजा का समय: आज सुबह से ही शुभ मुहूर्त शुरू हो चुका है। भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें।
विशेष अर्पण: आज के दिन श्रीहरि को पीले फूल, ऋतु फल (खरबूजा/आम) और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
वरूथिनी एकादशी मंत्र: पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
कथा श्रवण: व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब आप वरूथिनी एकादशी की पौराणिक कथा पढ़ते या सुनते हैं।
चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है।
शात्विक आहार: यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तो भी आज के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से दूर रहें।
परोपकार: आज के दिन किसी की बुराई न करें और मौन का पालन करने का प्रयास करें।
व्रत का पारण कल, 14 अप्रैल 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा।