बगला पञ्जर न्यास स्तोत्र

बगला पूर्वतो रक्षेद् आग्नेय्यां च गदाधरी।
पीताम्बरा दक्षिणे च स्तम्भिनी चैव नैऋते ।।1।।

जिह्वाकीलिन्यतो रक्षेत् पश्चिमे सर्वदा हि माम्।
वायव्ये च मदोन्मत्ता कौवेर्यां च त्रिशूलिनी ।।2।।

ब्रह्मास्त्रदेवता पातु ऐशान्यां सततं मम।
संरक्षेन् मां तु सततं पाताले स्तब्धमातृका ।।3।।

ऊर्ध्वं रक्षेन् महादेवी जिह्वा-स्तम्भन-कारिणी।
एवं दश दिशो रक्षेद् बगला सर्व-सिद्धिदा ।।4।।

एवं न्यास-विधिं कृत्वा यत् किञ्चिज्जपमाचरेत्।
तस्याः संस्मरेणादेव शत्रूणां स्तम्भनं भवेत् ।।5।।

बगला पंजर न्यास स्तोत्र, एक दुर्लभ और गोपनीय मंत्र, सफलता दिलाता है और दुश्मनों को शांत करता है। यह देवी बगलामुखी से जुड़ा हुआ है और साधकों को धन, स्वास्थ्य और खुशी प्राप्त करने में मदद करने का एक सिद्ध मंत्र है। इस स्तोत्र का उद्देश्य देवता, माँ बगलामुखी को किसी के हृदय में स्थापित करना है, जो परम शक्ति और मोक्ष के लिए एक आध्यात्मिक आकांक्षा है। इस भजन का पालन करके भक्त अपनी सांसारिक इच्छाओं को प्राप्त कर सकते हैं और मां बगलामुखी के साथ संबंध स्थापित कर सकते हैं। इसे माता का हृदय और जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने का मार्ग माना जाता है।









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