चेन्नई/नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026: तमिलनाडु की थिरूपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित भगवान मुरुगन के प्राचीन मंदिर में सदियों पुरानी दीप प्रज्ज्वलन की परंपरा को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत की मदुरै खंडपीठ ने राज्य की द्रमुक (DMK) सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पहाड़ी के शिखर पर स्थित 'दीपाथून' (दीप स्तंभ) पर कार्तिकेय दीपम जलाने के एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है।
इस फैसले को भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों ने 'सनातन की जीत' और 'तुष्टीकरण की राजनीति की हार' बताया है।
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा:
"यह फैसला उन भक्तों के लिए न्याय है जो सदियों से भगवान मुरुगन की सेवा में दीप जलाते आए हैं। राज्य सरकार द्वारा इस पवित्र अनुष्ठान को रोकने की कोशिश करना उनकी 'हिंदू विरोधी मानसिकता' को दर्शाता है। मद्रास हाई कोर्ट का यह आदेश तुष्टीकरण की राजनीति पर एक कड़ा तमाचा है।"
गोयल ने आगे कहा कि तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था का बहाना बनाकर इस परंपरा को रोकने की कोशिश की थी, जिसे अदालत ने 'बेतुका' (Ridiculous) करार दिया है।
थिरूपरनकुंद्रम पहाड़ी पर एक पत्थर का स्तंभ (दीपाथून) है, जहां सदियों से कार्तिकेय दीपम के अवसर पर विशाल दीप जलाया जाता रहा है।
सरकार का तर्क: तमिलनाडु सरकार और वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि दीप जलाने से पास में स्थित एक दरगाह की शांति भंग हो सकती है और कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है।
अदालत का फैसला: न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह स्थान मंदिर की संपत्ति है। अदालत ने कहा कि किसी सरकार को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस स्तर तक नहीं गिरना चाहिए कि वह एक दिन के धार्मिक अनुष्ठान को रोकने के लिए झूठे भय पैदा करे।
इस आदेश के बाद मदुरै और चेन्नई सहित तमिलनाडु के कई हिस्सों में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। थिरूपरनकुंद्रम मंदिर में विशेष 'विजय पूजा' का आयोजन किया गया। भाजपा की तमिलनाडु इकाई ने इसे राज्य सरकार के अहंकार की हार बताया है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि मंदिर प्रबंधन एएसआई (ASI) और पुलिस के समन्वय से दीप प्रज्ज्वलन का कार्य संपन्न करेगा। हालांकि, भीड़भाड़ से बचने के लिए वहां केवल मंदिर के कर्मचारियों को ही जाने की अनुमति होगी और पूरे आयोजन की निगरानी जिलाधिकारी (DM) करेंगे।
नोट: यह लेख कानूनी रिपोर्टों, शास्त्रों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। किसी विशिष्ट व्याख्या के लिए कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लें।