दुआदसी या वत्स द्वादशी 2023

दुआदसी या वत्स द्वादशी 2023

महत्वपूर्ण जानकारी

  • द्वादशी या वत्स द्वादशी 2023
  • सोमवार, 11 सितंबर 2023
  • द्वादशी तिथि प्रारंभ: 10 सितंबर 2023 अपराह्न 09:28 बजे
  • द्वादशी तिथि समाप्ति: 11 सितंबर 2023 पूर्वाह्न 11:52 बजे

भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की द्वादशी बछवास के रूप में मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ मूँग, मोठ तथा बाजरा अंकुरित करके मध्याह्न के समय बछड़े को खिलाती हैं। व्रती भी इस दिन उपरोक्त अन्न का ही सेवन करता है। इस दिन गाय का दूध, दही वर्जित है। सर्वत्र भैंस का दूध ही प्रयोग किया जाता है।

भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की द्वादशी को बछवारस के अतिरिक्त ओक दुआस या बलि दुआदसी या वत्स दुआदशी के रूप में भी मनाते हैं। यह व्रत पुत्र कामना के लिया किया जाता है। इसे पुत्रवती स्त्रियाँ ही करती हैं। इस दिन बछवारस पर्व की भांति अंकुरित मोठ, मूँग तथा चने आदि चढ़ाए जाते हैं। इस दिन द्विदलीय अन्न का प्रयोग का विशेष माहात्म्य है। एक दलीय अन्न तथा गौ दुग्ध वर्जित है।

कथा

श्रीकृष्ण, कृष्ण पक्ष की द्वादशी को पहल बार जंगल में गौएं-बछड़े चराने हेतु गए। माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को पूरी तरह सजाकर गौएँ चराने के लिए भेजा था। पूजा पाठ के बाद गोपाल ने बछड़े खोल दिए। यशोदा ने बलराम से कहा, ‘बछड़ों को चराने दूर मत जाना। श्रीकृष्ण को अकेले मत छोड़ना।’ गोपाल द्वारा गोवत्साचारण की इस पुण्य तिथि को पर्व के रूप में मनाया जाता हैं।









2022 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार











Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं