हरिद्वार/ऋषिकेश: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) के समापन के साथ ही अत्यंत पावन 'वैशाख' महीने की शुरुआत हो गई है। स्कंद पुराण के अनुसार, "न वैशाख समो मासो, न सत्येन समं युगम्" अर्थात् वैशाख के समान कोई महीना नहीं है और सत्य के समान कोई युग नहीं है। यह महीना भगवान विष्णु और परशुराम जी की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
वैशाख के महीने में सूर्य देव का ताप बढ़ने लगता है और गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ती है। ऐसे में 'जल दान' को धर्म शास्त्रों में 'महादान' की श्रेणी में रखा गया है।
पुराणों के अनुसार: शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति वैशाख में प्यासे को पानी पिलाता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु स्वयं जल के रूप में विराजमान रहते हैं, इसलिए राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या पशु-पक्षियों के लिए परिंडे रखना सीधे ईश्वर की सेवा मानी जाती है।
पितृ दोष से मुक्ति: वैशाख में जल का दान करने से पितर तृप्त होते हैं। यदि कुंडली में पितृ दोष या मानसिक अशांति है, तो मिट्टी के घड़े का दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: बढ़ती गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना और प्रकृति में जल के स्रोत बनाए रखना जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। यह दान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है।
मिट्टी के घड़े का दान: आज के समय में किसी मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर ठंडा पानी भरने के लिए मिट्टी का घड़ा (मटका) दान करें।
पीपल की पूजा: वैशाख में पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने से त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की कृपा प्राप्त होती है।
सत्तू और मौसमी फल: इस महीने में सत्तू, खरबूजा और आम जैसे ठंडी तासीर वाली चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।
भगवान विष्णु का अभिषेक: प्रतिदिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए तुलसी दल अर्पित करें।
नदी स्नान: यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। इससे पूरे वर्ष के पापों का शमन होता है।