जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जब चारों तरफ अंधेरा दिखाई देता है। संकट इतने गहरे हो जाते हैं कि इंसान को समझ नहीं आता कि वह किस राह पर जाए। सनातन परंपरा में ऐसी कठिन घड़ियों से बाहर निकलने के लिए गोस्वामी तुलसीदास जी रचित श्री रामचरितमानस को एक दिव्य ग्रंथ माना गया है। मानस की हर चौपाई अपने आप में एक सिद्ध मंत्र है, लेकिन इनमें से एक चौपाई ऐसी है जिसे 'सिद्ध संकटनाशक चौपाई' का दर्जा प्राप्त है।
यदि जीवन के किसी भी कठिन मोड़ पर आप सच्चे मन से इस चौपाई का आश्रय लेते हैं, तो देवाधिदेव महादेव की असीम कृपा से आपको उस संकट से निकलने का मार्ग तुरंत मिल जाता है। आइए जानते हैं इस चमत्कारी चौपाई, इसके गहरे अर्थ और महिमा के बारे में।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित वह परम पवित्र चौपाई इस प्रकार है:
आसुतोष तुम्ह अवढर दानी।
आरति हरहु दीन जनु जानी॥
इस चौपाई में भक्त भगवान शिव के सामने पूरी तरह शरणागत होकर प्रार्थना करता है:
"हे प्रभु! आप आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) और अवढरदानी (मुँहमाँगा दे डालने वाले) हैं। अतः मुझे अपना अत्यंत दीन और असहाय सेवक जानकर, मेरे जीवन के सभी दुखों और संकटों को दूर कीजिए।"
इस चौपाई में महादेव के लिए दो बहुत ही सुंदर और अलौकिक शब्दों का प्रयोग किया गया है, जो उनकी असीम करुणा को दर्शाते हैं:
'आशु' का अर्थ होता है शीघ्र (तुरंत) और 'तोश' का अर्थ होता है तुष्ट होने वाला (प्रसन्न होने वाला)। भगवान शिव अपने भक्तों की थोड़ी सी पुकार और सच्ची प्रार्थना से ही तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं, इसीलिए उन्हें 'आशुतोष' कहा जाता है। उन्हें रिझाने के लिए बहुत कठिन साधनाओं की आवश्यकता नहीं पड़ती; वे तो मात्र एक लोटा जल और भाव से अर्पण किए गए एक बेलपत्र के अभिषेक से ही पूरी तरह तुष्ट हो जाते हैं।
'अवढरदानी' का अर्थ होता है जो बिना कुछ सोचे-समझे, भक्त की पात्रता देखे बिना, उसका दामन खुशियों से भर दे। महादेव दया के सागर हैं। जब कोई भक्त संकट में होकर उन्हें पुकारता है, तो वे उसे मुँहमाँगा वरदान दे डालते हैं।
यूं तो इस चौपाई का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष संकट की स्थिति में इस विधि से जप करना चमत्कारी प्रभाव दिखाता है:
समय और शुद्धता: सुबह स्नान आदि से पवित्र होकर अपने घर के मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग के सामने बैठें।
दीपक प्रज्वलित करें: महादेव के सामने गाय के घी या तिल के तेल का एक दीपक जलाएं।
संकल्प लें: मन ही मन महादेव को अपनी समस्या बताएं और उससे मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
जप संख्या: इस सिद्ध चौपाई का कम से कम 21, 51 या 108 बार श्रद्धापूर्वक जप करें। यदि आप मंदिर में नहीं हैं और किसी विकट संकट में फंस गए हैं, तो आंखें बंद करके मानसिक रूप से भी इसका निरंतर जप कर सकते हैं।
रामचरितमानस की यह संकटनाशक चौपाई एक ऐसी आध्यात्मिक औषधि है, जो मनुष्य के भीतर के भय को समाप्त कर देती है। जब हम पूरी दुनिया से निराश होकर महादेव के 'आशुतोष' और 'अवढरदानी' रूप की शरण में जाते हैं, तो बड़ी से बड़ी विपत्ति भी पानी के बुलबुले की तरह नष्ट हो जाती है। अगर आप भी जीवन में किसी परेशानी से गुजर रहे हैं, तो आज ही से इस चौपाई को अपने जीवन का हिस्सा बनाइए और भोलेनाथ की चमत्कारी कृपा का अनुभव कीजिए।
।। ॐ नमः शिवाय ।।