

सबरीमाला (केरल), 3 जनवरी 2026: केरल के प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर, सबरीमाला में 'मकराविलक्कू' (Makaravilakku) उत्सव की तैयारियां अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई हैं। आगामी 14 जनवरी को होने वाले इस महापर्व को लेकर मंदिर प्रशासन (त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड) और राज्य सरकार ने कमर कस ली है। इस दिन 'मकर ज्योति' के अलौकिक दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मकराविलक्कू सबरीमाला के वार्षिक तीर्थयात्रा सीजन का सबसे पवित्र दिन माना जाता है।
मकर ज्योति: मकर संक्रांति की शाम को जब आकाश में मकर नक्षत्र दिखाई देता है, तब 'पोनम्बलमेडु' (Ponnambalamedu) की पहाड़ियों पर एक दिव्य चमक या ज्योति दिखाई देती है, जिसे 'मकर ज्योति' कहा जाता है।
तिरुवाभरणम यात्रा: इस उत्सव से पहले भगवान अयप्पा के शाही आभूषण (Thiruvabharanam) एक भव्य पालकी यात्रा में 'पंडलम पैलेस' से लाए जाते हैं, जिसे पहनकर भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है।

भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने कई नए कदम उठाए हैं:
स्पेशल दर्शन स्लॉट: भक्तों की सुविधा के लिए 'वर्चुअल क्यू' (Virtual Queue) बुकिंग के जरिए दर्शन के समय को व्यवस्थित किया गया है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: सन्निधानम, पंबा और आधार शिविरों में हजारों अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। संवेदनशील रास्तों पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है।
स्वास्थ्य और पेयजल: पहाड़ियों पर चढ़ने वाले भक्तों के लिए जगह-जगह ऑक्सीजन पार्लर, चिकित्सा शिविर और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालु न केवल मुख्य मंदिर में, बल्कि आसपास की पहाड़ियों जैसे इलवंकल और नीलाक्कल पर भी जमा होते हैं ताकि वे दूर से मकर ज्योति का दर्शन कर सकें। प्रशासन ने इन सभी 'व्यू पॉइंट्स' पर बैरिकेडिंग और प्रकाश की व्यवस्था मजबूत की है।
सबरीमाला की यह तीर्थयात्रा सांप्रदायिक सद्भाव का भी प्रतीक है, जहां भक्त 'वावर' (Vavar) स्वामी की मस्जिद में भी मत्था टेकते हैं, जो भगवान अयप्पा के परम मित्र माने जाते थे।