श्रीरंगम के श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर में 'वसंतोत्सव' (Vasanthotsavam) एक अत्यंत सुंदर और शीतल उत्सव है, जो गर्मियों की शुरुआत में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए मनाया जाता है।
जैसा कि हमने चर्चा की, चितिरई महोत्सव (Chitrai Utsavam) अप्रैल के अंत में संपन्न हो चुका है। अब मई के महीने में 'वसंतोत्सव' का आयोजन होने वाला है।
यहाँ इस उत्सव की तिथियों और महत्व की पूरी जानकारी दी गई है:
श्रीरंगम में वसंतोत्सव आमतौर पर तमिल महीने 'वैकासी' (Vaikasi) में मनाया जाता है।
अनुमानित समय: यह उत्सव मई के मध्य या अंत में शुरू होता है और 9 दिनों तक चलता है।
विशेष नोट: इस उत्सव का समापन अक्सर 'वैकासी विशाखम' (Vaikasi Visakam) के आसपास होता है।
प्रकृति और ईश्वर का संगम: यह उत्सव मंदिर के सुंदर 'नंदवनम' (बगीचे) में मनाया जाता है, जिसे भक्त शिरोमणि तोंडरडिप्पौड़ी आझवार ने तैयार किया था। यह हमें प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देता है।
शीतलता का प्रतीक: भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए भगवान नमपेरुमल (श्री रंगनाथ स्वामी का उत्सव विग्रह) को बगीचे के बीच बने 'वसंत मंडपम' में ले जाया जाता है। इस मंडप के चारों ओर पानी का एक छोटा कुंड होता है, जो वातावरण को ठंडा रखता है।
शाप से मुक्ति: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वसंतोत्सव के दौरान भगवान को अर्पित किया गया पवित्र जल ग्रहण करने से मनुष्य के कष्ट और पुराने शाप दूर होते हैं।
दिव्य प्रबंधम का गान: यह उन चुनिंदा उत्सवों में से एक है जहाँ भगवान वापस मंदिर लौटते समय 'दिव्य प्रबंधम' (तमिल वेदों) का गान सुनते हैं, जो एक अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक दृश्य होता है।
अभिषेकम: 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भगवान का सुगंधित चंदन, पनीर (गुलाब जल) और विभिन्न जड़ी-बूटियों से अभिषेक किया जाता है।
नंदवनम का प्रवास: हर शाम भगवान अपने गर्भगृह से निकलकर पालकी में सवार होकर बगीचे की ओर प्रस्थान करते हैं।
अश्व वाहन (Horse Vahanam): उत्सव के अंतिम दिन भगवान घोड़े के वाहन पर सवार होकर चारों 'चितिरई' गलियों में भ्रमण करते हैं, जो भक्तों के लिए एक भव्य दृश्य होता है।
यदि आपके पाठक मई के महीने में दक्षिण भारत की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो श्रीरंगम का वसंतोत्सव उनके लिए एक "आध्यात्मिक ट्रीट" होगा। बगीचे की हरियाली, पानी की फुहारें और मंत्रों का जाप—यह सब मिलकर एक अद्भुत शांति का अनुभव कराते हैं।