महाराष्ट्र: पंढरपुर विट्ठल मंदिर कॉरिडोर का काम तेज; 'वारी' तीर्थयात्रियों के लिए बनाई जा रही हैं आधुनिक सुविधाएं

सोलापुर/पंढरपुर, 10 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र पंढरपुर को एक नई पहचान मिलने जा रही है। काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित हो रहे 'विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर कॉरिडोर' परियोजना ने अब रफ्तार पकड़ ली है। आज जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक दर्शन मंडप और कॉरिडोर के दूसरे चरण के ब्लू प्रिंट को अंतिम रूप दिया। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य हर साल 'वारी' (आषाढ़ी एकादशी) के दौरान आने वाले लाखों वारकरी श्रद्धालुओं के अनुभव को सुखद और सुगम बनाना है।

129 करोड़ का भव्य 'दर्शन मंडप': पांच सितारा सुविधाएं

श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी समस्या लंबी कतारों में घंटों खड़े रहना है। इसे हल करने के लिए 129 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक दर्शन मंडप बनाया जा रहा है:

  • गोपालपुर रोड पर विस्तार: यह मंडप करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा, जिसका निर्माण कार्य अगले महीने से शुरू होने की उम्मीद है।

  • वातानुकूलित (AC) कतारें: पदस्पर्श दर्शन के लिए कतारों में एसी, शुद्ध पेयजल और बैठने की आधुनिक व्यवस्था होगी।

  • स्काईवॉक और लिफ्ट: बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए स्काईवॉक और लिफ्ट की सुविधा दी जाएगी, ताकि उन्हें मंदिर तक पहुंचने में शारीरिक कष्ट न हो।

  • लाइव स्क्रीन: पूरी कतार में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिससे भक्त कतार में खड़े होकर भी भगवान विट्ठल के लाइव दर्शन कर सकेंगे।

चंद्रभागा नदी और घाटों का कायाकल्प

कॉरिडोर परियोजना के तहत केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरी पंढरपुर नगरी का स्वरूप बदला जा रहा है:

  1. भक्त निवास: चंद्रभागा नदी के तट पर विशाल 'भक्त निवास' का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ हजारों श्रद्धालु एक साथ ठहर सकेंगे।

  2. 6-8 फीट चौड़े रास्ते: मंदिर की ओर जाने वाले संकरे रास्तों को चौड़ा कर 6 से 8 फीट का किया जा रहा है, ताकि भीड़ के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

  3. ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कॉरिडोर के दौरान 200 साल पुराने होळकर वाडा और शिंदे सरकार वाडा जैसी ऐतिहासिक इमारतों को सुरक्षित रखा जाएगा और उनका संरक्षण किया जाएगा।

वारकरी संप्रदाय और प्रशासन का समन्वय

शुरुआत में स्थानीय व्यापारियों और कुछ वारकरी समूहों द्वारा भूसंपादन (Land Acquisition) को लेकर विरोध देखा गया था। हालांकि, प्रशासन ने अब 'अधिकतम मुआवजा' और 'पुनर्वास पैकेज' के जरिए 80% से अधिक संपत्ति मालिकों की सहमति हासिल कर ली है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि यह कॉरिडोर वारकरी परंपरा और संस्कृति के 'त्रिवेणी संगम' के रूप में उभरेगा।


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