रामलक्ष्मण द्वादशी 2026: निर्जला एकादशी के ठीक बाद क्यों की जाती है श्री राम-लक्ष्मण की विशेष पूजा? जानिए महत्व, कथा और नियम

महत्वपूर्ण जानकारी

  • राम लक्ष्मण द्वादशी 2026: शुभ समय
  • रविवार, 26 जुलाई 2026
  • द्वादशी तिथि प्रारम्भ: 25 जुलाई 2026 प्रातः 11:34 बजे
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 26 जुलाई 2026 को दोपहर 01:58 बजे

सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का एक विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान है। इस पावन तिथि को 'रामलक्ष्मण द्वादशी' (Rama Lakshmana Dwadashi) या 'चम्पक द्वादशी' के रूप में मनाया जाता है। 

जहाँ एकादशी के दिन हम भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, वहीं द्वादशी के दिन प्रभु श्री राम और उनके परम प्रिय भाई लक्ष्मण जी के स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और भाईचारे व परिवार में प्रेम की स्थापना होती है। आइए, 'द डिवाइन इंडिया' के इस विशेष लेख में जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा।

1. क्यों मनाई जाती है रामलक्ष्मण द्वादशी? (पौराणिक महत्व)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास की इसी द्वादशी तिथि को त्रेतायुग में भगवान श्री राम और भाई लक्ष्मण जी ने महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने और असुरों का संहार करने के लिए प्रस्थान किया था।

  • भ्रातृ प्रेम का प्रतीक: यह दिन भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण है। लक्ष्मण जी ने जिस तरह अपने बड़े भाई श्री राम की सेवा की, यह व्रत उसी अटूट प्रेम को समर्पित है।

  • पुत्र प्राप्ति और सुख की कामना: शास्त्रों में वर्णित है कि जो भी विवाहित जोड़ा आज के दिन सच्चे मन से श्री राम और लक्ष्मण जी की संयुक्त पूजा करता है, उसे उत्तम और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है और घर की कलह हमेशा के लिए शांत हो जाती है।

2. कैसे करें पूजा?

इस व्रत की पूजा विधि बेहद सरल है, लेकिन इसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है:

  1. सुबह का संकल्प: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले या सफेद) धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।

  2. चौकी की स्थापना: घर के मंदिर में एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। (यदि हनुमान जी की भी तस्वीर हो, तो अत्यंत उत्तम है)।

  3. पूजा सामग्री: प्रभु को पीले फूल, चंदन, अक्षत (चावल), धूप और दीप अर्पित करें। आज के दिन श्री राम और लक्ष्मण जी को चम्पा के फूल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है, इसलिए इसे 'चम्पक द्वादशी' भी कहते हैं।

  4. विशेष भोग: मौसमी फलों (जैसे आम, खरबूजा) और सात्विक मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं।

  5. आरती और मंत्र: “ॐ रामाय नमः” या रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ करें और अंत में श्री राम जी की आरती करें।

3. आज के दिन क्या विशेष करें?

अगर आपने कल निर्जला एकादशी का व्रत रखा था, तो आज सुबह पारण के बाद इस द्वादशी व्रत की कथा सुनना या पढ़ना आपके एकादशी व्रत के पुण्य को भी दोगुना कर देता है। आज के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या जल से भरे पात्र का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।




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