ईडाणा माता मंदिर - राजस्थान

ईडाणा माता मंदिर - राजस्थान

महत्वपूर्ण जानकारी

  • पता: बम्बोरा, इडाना, राजस्थान 313706
  • खुलने और बंद होने का समय: 24 घंटे खुला।
  • आरती का समय: 05:30 पूर्वाह्न और 07:00 अपराह्न
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन, जो इदाना माता मंदिर से लगभग 63.4 किमी दूर है।
  • निकटतम हवाई अड्डा: महाराणा प्रताप हवाई अड्डा उदयपुर, जो इदाना माता मंदिर से लगभग 49 किमी दूर है।
  • क्या तुम्हें पता था: ईडाणा माता मंदिर में लकवा से ग्रसित रोगी माता के दर्शन हेतु आते है और माता के आर्शीवाद से मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते है। राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। देवी मां की प्रतिमा से हर महीने में दो से तीन बार अग्नि प्रजवल्लित होती है। इस अग्नि स्नान से भक्तों द्वारा चढ़ाई गयी चुनरियां व धागे भस्म हो जाते हैं।

ईडाणा माता मंदिर एक हिन्दूओं के महत्त्वपूर्ण मंदिर है जो कि भारत के राज्य राजस्थान में ईडाणा गांव में स्थित है। ये मंदिर राजस्थान की ईडाणा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये स्थान उदयपुर शहर से 60 कि.मी. दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है। इस मंदिर का नाम ईडाणा उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ईडाणा माता का दरबार खुले स्थान पर है। मां के दरबार में अखण्ड ज्योति भी है जो हमेशा जलती रहती है।

यह मंदिर अपने एक ऐसे चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है जिसे देखने के लिए भारत के सभी राज्यओं से लोग यहां आते है। भारत के बहुत सारे मंदिर अपने अपने चमत्कारिक शक्तियों के कारण प्रसिद्ध होते हैं। परन्तु इस मंदिर के चमत्कारिक शक्ति बिल्कुल अगल है। मां का ये दरबार बिल्कुल खुले एक चैक में स्थित है।

ईडाणा माता मंदिर में लकवा से ग्रसित रोगी माता के दर्शन हेतु आते है और माता के आर्शीवाद से मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते है। लकवा ग्रसित रोगी को पूरी रात माता के दरबार में सोना पड़ता है। ईडाणा माता की शक्ति ऐसी अनोखी है, जिसे देखकर लोग हैरान हो जाते है। यहां स्थित देवी मां की प्रतिमा से हर महीने में दो से तीन बार अग्नि प्रजवल्लित होती है। इस अग्नि स्नान से भक्तों द्वारा चढ़ाई गयी चुनरियां व धागे भस्म हो जाते हैं और इसे देखने के लिए मां के दरबार में भक्तों का मेला लगा रहता है। आज तक कोई भी इस बात का पता नहीं लगा पाया कि ये अग्नि कैसे जलती है।  

ईडाणा माता मंदिर में अग्नि स्नान होता है तो आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दृश्य को देखने आते है और अपनी इच्छा की पूर्ति करते है। ऐसा कहा जाता है कि ईडाणा माता पर अधिक भार होने पर माता स्वयं ज्वालादेवी का रूप धारण कर लेती हैं। ये अग्नि धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती है और इसकी लपटें 10 से 20 फीट तक पहुंच जाती है। ऐसा प्रतिमाह में दो से तीन बार होता है। इस अग्नि की खास बात यह है कि आज तक श्रृंगार के अलावा किसी अन्य चीज को कोई आंच तक नहीं आती। भक्त इसे देवी का अग्नि स्नान कहते हैं और इसी अग्नि स्नान के कारण यहां मां का मंदिर नहीं बन पाया।

ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस चमत्कारिक अग्नि के दर्शन करता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है। इस मंदिर में भक्त अपने इच्छा के पूर्ण होने के लिए त्रिशूल चढ़ाते है और निसंतान दम्पत्ति, संतान के लिए झुला चढ़ाते है। परन्तु यह मंदिर दो शक्तियों के कारण प्रसिद्ध है - पहला, जो रोगी लकवा से ग्रसित होता है, मां के दरबार में आकर स्वस्थ हो जाते हैं। दूसरा, मां के दरबार में लगने वाली अग्नि।

इस शक्ति पीठ की विशेष बात यह है कि यहाँ माँ के दर्शन चैबीस घंटें खुले रहते है द्य सभी लकवा ग्रस्त रोगी रात्रि में माँ की प्रतिमा के सामने स्थित चैक में आकर सोते है द्य दोनों नवरात्री यहाँ भक्तों की काफी भीड़ रहती है द्य इसके अतिरिक्त सभी प्रमुख त्यौहार यहाँ धूमधाम से मनाये जाते है।



Durga Mata Festival(s)













2021 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार










आप यह भी देख सकते हैं


Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं