वाराणसी: वैशाख का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। फ्रिज के ठंडे पानी के दौर में आज भी मिट्टी का घड़ा (मटका) अपनी जगह बनाए हुए है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मटके का पानी पीना केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी कुंडली के ग्रहों को शांत करने के लिए भी एक 'रामबाण' उपाय है?
ज्योतिष शास्त्र में मिट्टी के घड़े का संबंध प्रकृति के पंचतत्वों और विशेष ग्रहों से जोड़ा गया है। आइए जानते हैं कैसे एक मटका आपकी किस्मत बदल सकता है।
चंद्रमा की मजबूती (Strengthening the Moon): मिट्टी को 'पृथ्वी तत्व' और पानी को 'जल तत्व' माना जाता है। चंद्रमा जल का कारक है। जब हम मिट्टी के पात्र में पानी रखकर उसे पीते हैं, तो कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और मन में शांति बनी रहती है।
बुध ग्रह का दोष निवारण (Healing Mercury): मिट्टी बुध का प्रतिनिधित्व करती है। यदि आपकी वाणी में दोष है या व्यापार में हानि हो रही है, तो मिट्टी के घड़े से पानी पीना शुभ होता है। यह आपकी बुद्धि को कुशाग्र और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाता है।
मंगल की शांति (Pacifying Mars): जिन लोगों को अत्यधिक क्रोध आता है या जिनका मंगल भारी है, उनके लिए मटके का पानी शीतल औषधि का काम करता है। यह शरीर की गर्मी को शांत कर स्वभाव में सौम्यता लाता है।
शास्त्रों में वैशाख मास में 'वारी दान' (जल दान) का विशेष महत्व है। यदि आप इस महीने किसी प्याऊ में या मंदिर में पानी से भरा मिट्टी का घड़ा दान करते हैं, तो इससे पितृ दोष शांत होता है और आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्राकृतिक फिल्टर: मिट्टी का घड़ा पानी की अशुद्धियों को सोख लेता है और उसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है।
pH बैलेंस: मिट्टी की प्रकृति क्षारीय (Alkaline) होती है, जो पानी के अम्लीय (Acidic) गुणों को संतुलित करती है, जिससे एसिडिटी की समस्या नहीं होती।
मेटाबॉलिज्म: फ्रिज के पानी के विपरीत, मटके का पानी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रखता है और पाचन क्रिया को सुधारता है।