त्रयम्बकेश्वर मंदिर के 'अमृत कुंड' से प्रकट हुआ प्राचीन शिवलिंग: ASI की सफाई के दौरान बड़ी खोज

त्रयम्बकेश्वर मंदिर के 'अमृत कुंड' से प्रकट हुआ प्राचीन शिवलिंग: ASI की सफाई के दौरान बड़ी खोज

नासिक: भारत के समृद्ध और रहस्यमयी इतिहास में एक और सुनहरा पन्ना जुड़ गया है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, नासिक के ऐतिहासिक त्रयम्बकेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षण और जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। इसी काम के दौरान मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक जल टैंक, जिसे स्थानीय लोग 'अमृत कुंड' के नाम से जानते हैं, से एक प्राचीन पाषाण (पत्थर) का शिवलिंग बरामद हुआ है।

इस अद्भुत खोज ने न सिर्फ पुरातत्वविदों को बल्कि शिव भक्तों को भी बेहद उत्साहित कर दिया है।

कैसे हुई यह ऐतिहासिक खोज?

दरअसल, एएसआई (ASI) की टीम पिछले कुछ दिनों से अमृत कुंड के कायाकल्प और उसकी ऐतिहासिक साख को वापस लौटाने के काम में जुटी थी। सालों से कुंड के नीचे जमा हुई गाद, मिट्टी और मलबे को हटाने (Desilting) का काम चल रहा था। जैसे ही मजदूर और विशेषज्ञ कुंड की बिल्कुल निचली तलहटी तक पहुंचे, वहां मलबे के बीच दबा हुआ यह प्राचीन शिवलिंग दिखाई दिया।

सावधानीपूर्वक मलबे को साफ करने के बाद, पत्थर से तराशा हुआ यह सुंदर शिवलिंग पूरी तरह सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों के लिए यह किसी चमत्कार और गहरी आस्था के क्षण से कम नहीं है।

क्यों खास है यह खोज?

त्रयम्बकेश्वर मंदिर खुद अपने आप में सदियों पुराना है और इसका संबंध भगवान शिव के तीन रूपों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) से जोड़ा जाता है। मंदिर के ठीक बगल में स्थित अमृत कुंड का भी अपना एक खास धार्मिक महत्व है। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • यह शिवलिंग इस बात का पक्का सबूत है कि पुराने समय में इस जल कुंड का उपयोग न केवल स्नान के लिए, बल्कि विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और जल-अभिषेक के लिए भी किया जाता होगा।

  • गाद के नीचे दबे होने के कारण यह शिवलिंग बाहरी मौसम और नुकसान से पूरी तरह बचा रहा, जिससे इसकी प्राचीन बनावट आज भी वैसी ही है।

विरासत को बचाने की मुहिम रंग लाई

यह खोज इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि हमारे देश में पुरानी धरोहरों का संरक्षण कितना जरूरी है। अक्सर हम ऐतिहासिक जगहों को सिर्फ पर्यटन के नजरिए से देखते हैं, लेकिन जब वैज्ञानिक तरीके से उनकी देखभाल (Conservation) की जाती है, तो इतिहास के ऐसे कई दबे हुए राज सामने आते हैं।

ASI के अधिकारियों के मुताबिक, इस शिवलिंग की प्राचीनता और इसके कालखंड (Time Period) का पता लगाने के लिए आगे की जांच की जा रही है। फिलहाल, इस खबर के सामने आने के बाद से त्रयम्बकेश्वर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और श्रद्धा का माहौल है।

हर हर महादेव! 🪔🙏









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