वट पूर्णिमा व्रत 2027: जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

वट पूर्णिमा व्रत 2027: जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए वट पूर्णिमा व्रत (Vat Purnima Vrat) का विशेष महत्व है। यह व्रत पत्नियां अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखती हैं। मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में यह व्रत बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।

उत्तर भारत में मनाए जाने वाले 'वट सावित्री व्रत' (जो ज्येष्ठ अमावस्या को होता है) की तरह ही वट पूर्णिमा के दिन भी बरगद (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है और माता सावित्री व सत्यवान की कथा सुनी जाती है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2027 में वट पूर्णिमा व्रत कब है और इसके शुभ मुहूर्त क्या हैं।

वर्ष 2027 में वट पूर्णिमा व्रत कब है? (Vat Purnima Vrat 2027 Date)

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है।

  • व्रत की सही तारीख: वर्ष 2027 में वट पूर्णिमा व्रत 18 जून 2027 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

  • पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त:

    • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 18 जून 2027 को सुबह 04:34 बजे से।

    • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 19 जून 2027 को सुबह 06:13 बजे तक।

  • विशेष नोट: चूँकि 18 जून को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद है और यह पूरे दिन रहने वाली है, इसलिए वट पूर्णिमा का मुख्य व्रत और पूजा शुक्रवार, 18 जून को ही की जाएगी।

वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व (Significance of Vat Purnima)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे।

  • बरगद के पेड़ का रहस्य: बरगद के पेड़ को हिंदू शास्त्र में त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का रूप माना जाता है। इसकी जटाओं में साक्षात भगवान शिव का वास होता है।

  • दीर्घायु का वरदान: ऐसा माना जाता है कि जो भी सुहागिन महिला इस दिन वट वृक्ष के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा करती है, उसके पति को लंबी आयु मिलती है और वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

सरल पूजा विधि (Vat Purnima Puja Vidhi)

  1. स्नान और संकल्प: वट पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के सुंदर सुहाग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

  2. सामग्री तैयार करें: पूजा की थाली में भीगे हुए चने, फल (विशेषकर आम और केला), कलावा (कच्चा सूत), रोली, अक्षत, धूप-दीप और मिठाई रखें। साथ ही सावित्री और सत्यवान की मिट्टी की मूर्तियां भी रखें।

  3. वट वृक्ष की पूजा: किसी नजदीकी बरगद के पेड़ के पास जाएं। पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, रोली-अक्षत का तिलक लगाएं और फल-फूल चढ़ाएं।

  4. परिक्रमा और धागा बांधना: वट वृक्ष के तने पर कच्चे सूत या कलावे को लपेटते हुए 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करें।

  5. कथा श्रवण: पूजा संपन्न करने के बाद वहीं बैठकर सावित्री और सत्यवान की कथा ध्यान से सुनें या पढ़ें। इसके बाद आरती करें और घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।




मंत्र






प्रश्न और उत्तर


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वट सावित्री और वट पूर्णिमा व्रत में क्या अंतर है?

दोनों व्रत का उद्देश्य एक ही है (पति की लंबी आयु), लेकिन उत्तर भारत (यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश) में यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाता है जिसे वट सावित्री कहते हैं। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे वट पूर्णिमा कहा जाता है।


क्या कुंवारी लड़कियां भी वट पूर्णिमा का व्रत रख सकती हैं?

मुख्य रूप से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अच्छे पति की कामना के लिए कुंवारी कन्याएं भी इसे रखती हैं।







2026 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार











Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं