भगवद गीता अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद गीता अध्याय 1, श्लोक 17

काश्यश्च परमेष्वास: शिखण्डी च महारथ: |
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजित: || 17||

महान धनुर्धर और काशी के राजा, महान योद्धा शिखंडी, धृष्टद्युम्न, विराट, और अजेय सत्यकी.

शब्द से शब्द का अर्थ:

काशी - काशी का राजा
चा - और
परम-इशु - दास-उत्कृष्ट धनुर्धर
शिखंडी - शिखंडी
चा - भी
महा-रत्न - योद्धा जो अकेले ही दस हजार साधारण योद्धाओं की ताकत से मेल खा सकते थे
धृष्टद्युम्नो - धृष्टद्युम्न
विराटः - विराट
चा - और
सात्यकिह - सत्यकी
अपराजितः - अजेय

 



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