रमा या रंभा एकादशी 2022

रमा या रंभा एकादशी 2022

महत्वपूर्ण जानकारी

  • रंभा या रमा एकादशी 2022
  • शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2022 अपराह्न 04:04 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2022 शाम 05:22 बजे

यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस एकादशी को रम्भा या रमा एकादशी कहा जाता है। विवाहिता स्त्रियों के लिए यह व्रत सभाग्य देने वाला और सुख प्रदान करने वाला कहा गया है। इस दिन भगवान कृष्ण का सम्पूर्ण वस्तुओं से पूजन, नैवेद्य तथा आरती कर प्रसाद वितरित करें। द्वादशी तिथि को ब्रह्मण को भोजन कराकर एवं दक्षिणा देकर विदा करें फिर व्रती को अन्न ग्रहण करना चाहिए।

रम्भा या रमा एकादशी कथा

पुराने समय में मुचुकुन्द नाम का दानी, धर्मात्म राजा था। वह प्रत्येक एकादशी का व्रत करता था। राज्य की प्रजा भी उसके देखा देखी प्रत्येक एकादशी का व्रत रखने लगी थी। राजा के चन्द्रभागा नाम की एक पुत्री थी। वह भी एकादशी का व्रत करती थी।

उसका विवाह राजा चन्द्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ। शोभन राजा के साथ ही रहता था। इसलिए वह भी एकादशी का व्रत करने लगा। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को शोभन ने एकादशी का व्रत रखा परन्तु भूख से व्याकुल होकर मृत्यु को प्राप्त हो गया। इससे राजा, रानी और पुत्री बहुत दुःखी हुए परन्तु एकादशी का व्रत करते रहे।

शोभन को व्रत के प्रभाव से मन्दराचल पर्वत पर स्थित देव नगर में आवास मिला। वहाँ उसकी सेवा में रम्भादि अप्सराएँ तत्पर थीं। अचानक एक दिन मुचुकुन्द मन्दराचल पर्वत पर गये तो वहाँ पर उन्होंने शोभन को देखा। घर आकर उन्होंने सब वृतान्त रानी एवं पुत्री को बताया। पुत्री यह समाचार पाकर पति के पास चली गई तथा दोनों सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगे। उनकी सेवा में रम्भादि अप्सराएँ लगीं रहती थीं। इसलिए इस एकादशी को रम्भा एकादशी कहते हैं।




अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


2022 में रमा एकादशी कब है?

रमा एकादशी शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022 को है। एकादशी 20 अक्टूबर 2022 को शाम 04:04 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2022 को शाम 05:22 बजे समाप्त होगी।


कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी कब है?

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष एकादशी शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022 को है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।


रमा एकादशी के दिन किसकी पूजा की जाती है?

रमा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान जी के केशव रूप की विधिवत धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प एवं मौसम के फलों से पूजा की जाती है।






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