नलहाटी शक्ति पीठ

Nalhati Shakti Peeth

Short information

  • Location: Nalahati, Temple Road, Nalhati, West Bengal 731243.
  • Timings: Open 05:30 am and Close 08:30 pm (timing is changed according to the season).
  • Best time to visit : Between August to March and During the festival Durga Puja and Navaratri. December is Best time to visit for who love nature.
  • Nearest Railway Station : Nalhati Junction at a distance of nearly 1.8 kilometres from Nalhati Shaktipeeth.
  • Nearest Airport : Netaji Subhas Chandra Airport at a distance of nearly 237 kilometres from Nalhati Shaktipeeth.
  • Major festivals: Durga Puja and Navaratri.
  • Did you know: Attahas temple is one of the 51 Shaktipeeths of Mother. It is said that, under the original idol of the temple, the mother's 'nala' and throat is about. No matter how much water is being poured down the throat, it will never gets overflowed or dried up.

नलहाटी शक्ति पीठ हिन्दूओं के एक लिए पवित्र स्थान है जो कि भारत के राज्य, पश्चिम बंगाल (कोलकत्ता) के, बीरभूल जिले के रामपुरहट में स्थित है। यह मंदिर मां नलतेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। नलहाटी शक्ति पीठ आस पास का इलाका पहाड व सुन्दर वन से घिरा हुआ हैै।

यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में शक्ति को ‘कालिका’ के रूप पूजा जाता है और भैरव को ‘योगीश’ के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाते हैं। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती का ‘उदर नली’ इस स्थान पर गिरा था।

ऐसा माना जाता है कि 252 वें बंगाली वर्ष या ‘बोंगापतो’, ’कामदेव’ (प्रेम और इच्छा के हिंदू देवता) जिन्होंने इस शक्ति पीठ के अस्तित्व के बारे में सपना में देखा था, इस नालाहती जंगल में मां सती के ‘उदर नली’ की खोज की। ऐसा कहा जाता है कि, मंदिर की मूल मूर्ति के नीचे, माता का ‘नाला’ व गला है। जिसमें कितना भी पानी डालों न पानी बहता है ना कभी सूखता है।

नलहाटी शक्ति पीठ में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर दुर्गा पूजा और नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इन त्यौहारों के दौरान, कुछ लोग भगवान की पूजा के प्रति सम्मान और समर्पण के रूप में व्रत (भोजन नहीं खाते) रखते हैं। त्यौहार के दिनों में मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।

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