हरिद्वार

हरिद्वार

महत्वपूर्ण जानकारी

  • Location: Haridwar, Uttarakhand 249401
  • Kumbh Mela 2021
  • Road: National Highway 58, between Delhi and Mana Pass passes through Haridwar connecting it with Ghaziabad, Meerut, Muzzafarnagar, Roorkee and Badrinath and National Highway 74 originating from Haridwar connects it with Kashipur, Kichha, Nagina, Pilibhit and Bareilly.
  • Nearest Rly. Station: Haridwar Railway Station
  • Nearest Airport : Jolly Grant Airport in Dehradun which is a located 35 km from Haridwar. Indira Gandhi International Airport in New Delhi is the nearest International Airport.

हरिद्वार का अर्थ ‘ईश्वर का द्वार’ है, जिसे मायापुरी, गंगाद्वार, मोक्षद्वार भी कहा जाता है, जो उत्तराखंड राज्य में एक प्राचीन शहर है।

यह गंगा नदी के तट पर स्थित हिंदुओं के सात पवित्रतम स्थानों में से एक है। गंगा नदी, गंगोत्री ग्लेशियर तथा अपने स्रोत से लगभग 250 किलोमीटर (157 मील) बहने के बाद, यह गंगा नदी इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में उतरती है।

हरिद्वार तीर्थयात्रा महत्व
समुद्र मंथन के अनुसार, हरिद्वार उन चार स्थलों में से एक है जहां दिव्य पक्षी गरुड़ द्वारा अमृत ले जाते हुए इन चार स्थानों पर अमृत की बून्दे गिरी थी। अन्य तीन स्थान है उज्जैन, नासिक और प्रयाग (इलाहाबाद)।

इन 4 स्थलों पर हर 3 वर्षों के बाद कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है। महाकुंभ मेला हरिद्वार में 2021 में आयोजित किया जाएगा।
कुंभ मेले के दौरान, भारत और विदेशों से लाखों तीर्थयात्रियों, भक्तों और पर्यटकों द्वारा मोक्ष प्राप्ति व अपने सभी पापों को धोने के लिए गंगा नदी में धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए एकत्रित होते है।

माना जाता है कि ब्रह्मा कुंड का स्थान वह स्थान है जहां पर अमृत गिरा था। यह हर की पौड़ी, जिसका अर्थ है भगवान के नक्शेकदम पर, और हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगीरथ, जो सूर्यवंशी राजा सगर के प्रपौत्र (श्रीराम के एक पूर्वज) थे, गंगाजी को सतयुग में वर्षों की तपस्या के पश्चात् अपने पूर्वजों के उद्धार और कपिल ऋषि के श्राप से मुक्त करने के लिए के लिए पृथ्वी पर लाये। ये एक ऐसी परंपरा है जिसे करोड़ों हिन्दू आज भी निभाते है, जो अपने पूर्वजों के उद्धार की आशा में उनकी चिता की राख लाते हैं और गंगाजी में विसर्जित कर देते हैं।

गंगा के किनारे शाम आरती की जाती है। नदी में तैरते सुनहरे कपलंे का प्रतिबिंब आगंतुकों को घाट के एक भव्य दृश्य बनाता है।

हर की पौढी के आस-पास के कई मंदिर हैं सुचित सिंह द्वारा निर्मित किया गया चंडी देवी मंदिर गंगा नदी के तट पर एक नील पर्वत के ऊपर स्थित है। माया देवी मंदिर एक जगह पर स्थित है, जहां यह कहा जाता है कि देवी सती के दिल और नाभि गिरे थे। यह स्थान सिद्धपीठों में से एक है। मानवसा देवी मंदिर है जो बिल्वा पर्वत के ऊपर स्थित है और देवी मानसा देवी को समर्पित है। कवड़ मेला, सोमवती अमावस्या मेला, गंगा दशरा, गुगल मेला जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।
हरिद्वार में स्नान घाट

  • हर की पौड़ी
  • अस्थी प्रवाह घाट
  • सुभाष घाट
  • गौ घाट
  • शपथ सरवोर क्षेत्र घाट
  • सर्वनंद घाट
  • पन्द्वीप घाट
  • कांगड़ा घाट
  • रूड बाला वाला घाट
  • गणेश घाट
  • वार्गी शिविर घाट
  • सती घाट
  • दक्षेश्वर घाट
  • सिंह द्वार घाट
  • सीता घाट

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