देवी कन्याकुमारी कुमारी अम्मन मंदिर - बाणासुर नाम राक्षस को मारने के लिए कुमारी देवी ने था जन्म

देवी कन्याकुमारी कुमारी अम्मन मंदिर - बाणासुर नाम राक्षस को मारने के लिए कुमारी देवी ने था जन्म

महत्वपूर्ण जानकारी

  • पता: सन्नेथी स्ट्रीट, कन्याकुमारी, तमिलनाडु, 629702, भारत।
  • खुलने और बंद होने का समय: सुबह का समय - सुबह 4:30 से दोपहर 12:30 बजे तक, शाम का समय - शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
  • कुमारी अम्मन मंदिर कन्याकुमारी फोन: 04652 246 223
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: कुमारी अम्मन मंदिर से लगभग 1.6 किमी की दूरी पर कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन।
  • निकटतम हवाई अड्डा: कुमारी अम्मन मंदिर से लगभग 101 किमी की दूरी पर त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा।
  • क्या आप जानते हैं : कुमारी देवी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। बाणासुर नाम के राक्षस को मारने के लिए पार्वती माता ने कुमारी देवी का जन्म लिया था।

कुमारी अम्मन मंदिर हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कुमारी अम्मन मंदिर भगवान शिव की पत्नी माता पार्वती को समर्पित है। कुमारी अम्मन को भगवती अम्मन के नाम से भी जाना जाता है। कुमारी अम्मन मंदिर भारत के राज्य तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित है। कुमारी अम्मन मंदिर तीनों समुद्रों ‘हिन्द महासागर‘, ‘अरब सागर’ और ‘बंगाल की खाडी’ की धाराओं का संगम स्थल पर बना हुआ है। यहां सागर की लहरों की आवाज स्वर्ग के संगीत की भांति सुनाई देती है। मंदिर के बाई ओर 500 मीटर की दूरी पर ‘सावित्री घाट’, ‘गायत्री घाट’, ‘स्याणु घाट’ और ‘तीर्थ घाट’ स्थित हैं। भक्तगण मंदिर में प्रवेश करने से पहले त्रिवेणी संगम बने इन्ही घाटों पर डुबकी लगाने की पंरपरा हैं। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार को हमेशा बंद करके रखा जाता है।

कुमारी अम्मन मंदिर का महत्व

कुमारी अम्मन मंदिर दुनिया के सबसे पवित्र मंदिरों में एक है। इस मंदिर का नाम 108 शक्तिपीठ में आता है। यह मंदिर कुमारी माता का घर है। जिसे कुमारी देवी कहा जाता है। कुमारी देवी को पार्वती माता का अवतार माना जाता है। पार्वती माता ने बाणासुर नाम राक्षस को मारने के लिए कुमारी देवी का जन्म लिया था। बाणासुर को भगवान शिव ने यह वरदान दिया था कि उसकी मृत्यु केवल कुमारी कन्या हाथों से ही होगी। यह मंदिर लगभग 3000 साल से भी अधिक पुराना है और मंदिर न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। कन्याकुमारी का यह प्राचीन मंदिर भी मंत्रमुग्ध कर देने वाला प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करता है क्योंकि यह समुद्र के विशाल फैलाव के किनारे स्थित है। आध्यात्मिक आभा, लुभावनी प्राकृतिक सुंदरता और एक प्राचीन वास्तुकला इस मंदिर को न केवल भक्तों के लिए बल्कि मंदिर की यात्रा पर आने वाले हर यात्री के लिए एक धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।

देवी कन्या कुमारी मुख्य आकर्षण

कन्याकुमारी मंदिर की पीठासीन देवता कुमारी अम्मन हैं, जिन्हें भगवती अम्मन के नाम से भी जाना जाता है। देवी कन्या कुमारी की आकर्षक मूर्ति की उल्लेखनीय विशेषता देवी की हीरे की नाक की अंगूठी है। नोज रिंग की आकर्षक चमक से जुड़ी कई प्रचलित कहानियां हैं। पौराणिक कथा के अनुसार नोज़ रिंग हीरा किंग कोबरा से प्राप्त किया गया था। एक प्रचलित कथा के अनुसार, नाक की अंगूठी से परावर्तित होने वाली चमक इतनी तेज है कि एक बार एक नाविक ने इसे लाइटहाउस समझ लिया था। जिसके परिणाम स्वरूप जहाज चट्टानों से टकरा गया था। यही कारण है कि मंदिर के पूर्वी द्वार को बंद रखा जाता है और वर्ष में केवल पांच बार विशेष अवसरों पर खोला जाता है।

कुमारी देवी मंदिर का निर्माण

कुमारी अम्मन मंदिर का निर्माण पाण्ड्य राजवंश के शासन काल में हुआ था। बाद में विजयनगर, चोल और नायक राजाओं द्वारा पुनर्निमाण किया गया था। मंदिर में सोलह स्तम्भों का एक मंडप निर्मित है। मंदिर के गर्भग्रह में देवी कुमारी की मूर्ति स्थिपित है। जो इस मंदिर के मुख्य आकर्षण है। मंदिर में प्रवेश केवल उत्तरी द्वार से ही किया जाता है। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार को हमेशा बंद करके रखा जाता है। मंदिर परिसर के भीतर भगवान सूर्य देव, भगवान गणेश, भगवान अयप्पा स्वामी, देवी बालसुंदरी और देवी विजया सुंदरी को समर्पित कई अन्य मंदिर हैं। मंदिर के अंदर एक कुआं है जहां से देवी के अभिषेक के लिए पानी का उपयोग किया जाता है। इसे मूल गंगा तीर्थम के नाम से जाना जाता है।

कुमारी अम्मन मंदिर के प्रसिद्ध त्योहार

देवी के दर्शन हेतु वर्ष के किसी भी समय जाया जा सकता है और देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। वार्षिक उत्सवों के दौरान यात्रा करना एक पूरी तरह से अलग अनुभव प्रदान करता है। वैसाखी त्योहार कुमारी अम्मन मंदिर का मुख्य त्योहा माना जाता है। वैसाखी त्योहार 10 दिनों की अवधि के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान धार्मिक जुलूसों का आयोजन किया जाता है।

मंदिर के अन्य महत्वपूर्ण त्योहार नवरात्रि महोत्सव, चित्रा पूर्णिमा उत्सव और कलाभम उत्सव हैं।




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