गौरी शंकर मंदिर

गौरी शंकर मंदिर

महत्वपूर्ण जानकारी

  • स्थान: 2573, चांदनी चौक रोड, चांदनी चौक, दिल्ली, 110006।
  • खुलने और बंद होने का समय: सुबह 5.00 बजे से सुबह 10.00 बजे तक और शाम 5.00 बजे से रात 10 बजे तक
  • आरती का समय: सुबह 06:00 बजे से 07:00 बजे तक।
  • जाने का सबसे अच्छा समय: सुबह और शाम की आरती के दौरान सबसे अच्छा समय दर्शन करने के लिए
  • निकटतम मेट्रो स्टेशन: गौरी शंकर मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: गौरी शंकर मंदिर से लगभग 1.2 किलोमीटर की दूरी पर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन।
  • क्या आप जानते हैं: मंदिर में लगभग 800 साल पुराना शिवलिंग है

800 वर्षीय गौरी शंकर मंदिर एक हिंदू मंदिर है और दिगंबर जैन लाल मंदिर के पास चांदनी चैक में मुख्य पुरानी दिल्ली सड़क पर स्थित है। गौरी शंकर मंदिर पूर्णतः भगवान शिव को समर्पित है और भगवान शिव के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। मंदिर में एक 800 वर्षीय भूरे रंग के शिव लिंग (पंख का पत्थर) महिला गुप्त अंग जोकि संगमरमर से बना है, प्रतिनिधित्व में घिरा हुआ है। शिव लिंग चांदी के बने सांपों से घिरा हुआ है और एक ब्रह्मांडीय स्तंभ, ब्रह्मांड का केंद्र या जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।

इतिहास के अनुसार मंदिर भगवान गंगा धर द्वारा बनाया गया था, एक मराठा सिपाही जो भगवान शिव का भक्त था। वह एक युद्ध में एक बार गंभीर रूप से घायल हो गया था और उनके जीवत रहने की संभावना निराशाजनक थी। इसलिए, उन्होंने भगवान शिव से अपने जीवन के लिए प्रार्थना की और यदि वह बच गया तो एक सुंदर मंदिर बनाने का वादा किया। वह सभी बाधाओं को हटाते हुये मंदिर का निर्माण किया। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार के निकट निचली हिस्से में उसका नाम हिंदी में अंकित है। 1959 में, सेठ जयपुरा ने मंदिर का पुनर्निर्माण किया और उसका नाम मंदिर की खिड़कियों पर अंकित किया गया। मंदिर के अंदर, भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती (गौरी-शंकर) और उनके दो पुत्र, गणेश और कार्तिक मूर्तिया स्थिपित हैं। भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियां जो कि शिव लिंग के पीछे है के आभूषण असली सोने से बने है व भगवान शिव लिंग के चारों ओर चांदी से बना हैं। लिंगम के पास भी एक रजत पानी का पोत है जिसमें पानी की बूंदें लगातार गिरती रहती हैं।

मंदिर का दौरा करने का सबसे अच्छा समय शिवरात्रि के त्यौहार के दौरान होता है जब यह शानदार ढंग से सजाया जाता है और भक्ति गतिविधियों से भरा होता है। कोई विशेष रूप से सोमवार को मंदिर में जा सकता है, जो भगवान शिव का दिन है। मंदिर पूरे वर्ष खाला रहता है और सभी जातियों और पंथ के आगंतुकों का स्वागत करता है।



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