श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

महत्वपूर्ण जानकारी

  • Location: Vishwanath Temple, Uttarkashi, Uttarakhand 249151
  • Timings: 06:00 am to 08:00 pm
  • Nearest Airport : Jolly Grant airport of Dehradun at a distance of nearly 181 kilometres from Kashi Vishwanath Temple.
  • Nearest Railway Station: Rishikesh railway station at a distance of nearly 167 kilometres from Kashi Vishwanath Temple.
  • Did you know: One amazing feature of the trishul is that it cannot be moved with your entire body force but it vibrates the moment you apply pressure with one of your fingers.

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर हिन्दूओं के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है यह मंदिर उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड भारत में से स्थित है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी में सबसे पुराना और सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है।  श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी ंके किनारे स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह नदी गंगोत्री धाम से आती है। मंदिर के आसपास पहाड़ों के शानदार व मनमोहक प्राकृतिक दृश्य देखे जा सकते है।

उत्तरकाशी में यह मंदिर अपनी लोकप्रियता के कारण चार धाम यात्रा का हिस्सा भी माना जाता है जो तीर्थयात्री गंगोत्री धाम की यात्रा करते है, वह उत्तरकाशी के इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान शिव के दर्शन जरूर करता है।

ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर परशुराम द्वारा बनाया गया था। बाद में, सुदर्शन की पत्नी महारानी खानेटी ने 1857 में इसका पुननिर्माण किया था।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है जिसकी ऊंचाई 56 सेंटीमीटर तथा शिवलिंग का झुकाव दक्षिण दिशा की ओर है। मंदिर के गर्भगृह में, देवी पार्वती और गणेश भी विराजमान है। मंदिर के बाहरी कक्ष में नदंी है। ध्यान गोपाल और ऋषि मार्कंडेय की मूर्ति यहां ध्यान मुद्रा में है।

शक्ति मंदिर
देवी पार्वती को समर्पित शक्ति मंदिर, विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने स्थित है। यहां का मुख्य आकर्षण एक विशाल और भारी त्रिशूल है - जिसकी ऊंचाई में लगभग 26 फुट है जो देवी दुर्गा द्वारा शैतानों पर फेंका गया था।

मां की शक्ति को, यहां एक विशाल त्रिशूल के रूप में देखा जाता है, जिसका अनुमान यह त्रिशूल लगभग 1500 वर्ष से अधिक पुराना है और इस त्रिशूल को उत्तराखंड के सबसे पुराने अवशेषों में से एक माना जाता है। यह प्राचीन समय में तिब्बती शिलालेखों का व्यापक इंडो-तिब्बती संस्कृति आदान-प्रदान का संकेत है। नागा राजवंश का ब्योरा मेटल ट्राइडेंट पर अंकित है जो कि 26 फीट ऊँचा है, मुख्य शिव मंदिर के समीप रखा गया है।

त्रिशूल की एक आश्चर्यजनक विशेषता यह है कि त्रिशूल आपके पूरे शरीर के बल से नहीं हिलाया जा सकता है, लेकिन हाथ के एक उंगली से यह त्रिशूल हिल जाता है।



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